नेपाल में पांच मार्च को होने वाले चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री भी आजमाएंगे किस्मत

नेपाल में पांच मार्च को होने वाले चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री भी आजमाएंगे किस्मत

नेपाल में पांच मार्च को होने वाले चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री भी आजमाएंगे किस्मत
Modified Date: January 21, 2026 / 03:19 pm IST
Published Date: January 21, 2026 3:19 pm IST

(शिरिष बी प्रधान)

काठमांडू, 21 जनवरी (भाषा)नेपाल में ‘जेन जेड’ के विरोध प्रदर्शनों के महीनों बाद पांच मार्च को कराए जा रहे आम चुनाव में चार पूर्व प्रधानमंत्री भी अपनी किस्मत आजमाएंगे।

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के अध्यक्ष और ‘जेन-जेड’आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ने को मजबूर हुए के पी शर्मा ओली ने आगामी चुनाव के लिए झापा-5 सीट से नामांकन दाखिल किया है। वहीं, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र)के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल ‘प्रचंड’ रुकुम पूर्व से किस्मत आजमा रहे हैं।

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दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के माधव कुमार नेपाल और प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के बाबूराम भट्टराई ने क्रमशः रौतहट-1 और गोरखा-2 निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन दाखिल किया है।

हालांकि, दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता झाला नाथ खनाल इस दौड़ में शामिल नहीं हैं।

नेपाल में ‘जेन-जेड’ युवाओं के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ओली ने नौ सितंबर को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद देश में आम चुनाव आवश्यक हो गए थे।

वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक दैनिक के संपादक प्रह्लाद रिजाल का कहना है, ‘‘पिछले साल सितंबर में ‘जेन जेड’ के विद्रोह का एक मुख्य कारण यह था कि पिछले 15 वर्षों में, तीन शीर्ष नेताओं, देउबा, प्रचंड और ओली एक के बाद एक प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के लिए जोड़-तोड़ करते रहे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जेन जेड’ (1997 से 2012 के बीच जन्में बच्चे) के युवा बदलाव चाहते थे और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे पुराने नेतृत्व से तंग आ चुके हैं। इसके बावजूद, हमारे पास ये चार नेता हैं जिनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है।’’

ओली 74 वर्ष के हैं, प्रचंड और भट्टाराई दोनों की उम्र 71 साल है। माधव कुमार नेपाल 72 वर्ष के हैं।

इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे दो पूर्व प्रधानमंत्रियों में से, खनाल ने स्वेच्छा से दौड़ से दूर रहने का विकल्प चुना है, जबकि देउबा को अपनी ही पार्टी के युवा नेताओं के प्रतिरोध के कारण मैदार से बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक धनंजय शर्मा ने कहा, ‘‘देउबा अपने दादेलधुरा निर्वाचन क्षेत्र से आठवीं बार चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष गगन थापा ने अंततः उन्हें ‘जेन जेड’ की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव से दूर रहने के लिए मना लिया।’’

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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