अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच क्या हो रहा है, इसे समझने के चार तरीके
अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच क्या हो रहा है, इसे समझने के चार तरीके
(इयान मैनर्स, लुंद विश्वविद्यालय)
लुंद (स्वीडन), 10 जनवरी (द कन्वरसेशन) यूरोपीय देश विशेष रूप से डेनमार्क, ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर अमेरिकी अधिकारियों की ओर से दी जा रही धमकियों के बाद स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया देने की कोशिश कर रहे हैं।
तीन जनवरी को की गई कार्रवाई में वेनेजुएला के नेतृत्व को सफलतापूर्वक उखाड़ फेंकने के बाद, अमेरिका सरकार का हौसला बढ़ गया है और वह सीधे ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की बात कर रही है।
विभिन्न यूरोपीय नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है, लेकिन वे एक कथित सहयोगी द्वारा किए गए विश्वासघात पर कोई सुसंगत प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।
वर्ष 2001 में हुए 11 सितंबर के हमलों के बाद से, डेनिश सरकारों ने स्वेच्छा से अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान (2001-2021) और इराक (2003-2007) पर हुए आक्रमणों में हिस्सा लिया था। डेनमार्क के राजनीतिक परिदृश्य में दक्षिणपंथी आंदोलन के कारण डेनमार्क ने कुछ नॉर्डिक देशों और यूरोपीय संघ के सहयोग को अस्वीकार कर दिया।
हालांकि, 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए आक्रमण ने डेनमार्क की विदेश नीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर किया। देश यूरोपीय संघ की साझा सुरक्षा और रक्षा नीति में शामिल हो गया और नाटो के हाल में सदस्य बने फिनलैंड और स्वीडन के साथ सहयोग को और मजबूत किया।
ट्रंप जब दूसरी बार सत्ता में आए, तो अमेरिकी विदेश नीति के दक्षिणपंथी झुकाव ने डेनमार्क को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अपने यूरोपीय संघ के सहयोगियों से समर्थन मांगने के लिए मजबूर कर दिया।
यूरोपीय संघ का सदस्य होने के बावजूद, डेनमार्क ने ब्रिटेन की तरह यूरो मुद्रा से बाहर निकलने और न्याय एवं गृह मामलों में सहयोग न करने का विकल्प चुनकर खुद को इस संघ के बाहरी हिस्से में स्थापित कर लिया है।
लेकिन ग्रीनलैंड पर अमेरिका के किसी भी आक्रमण से डेनमार्क की यूरो के साथ 1982 से चली आ रही स्थिर विनिमय दर नीति के टूटने की आशंका है। इसलिए इसके आर्थिक प्रभावों के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रभाव भी होंगे।
अमेरिका की धमकियों और निश्चित रूप से ग्रीनलैंड में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप के परिणाम डेनमार्क से कहीं अधिक व्यापक होंगे। जो बाइडन के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान यूरोपीय संघ ने यूक्रेन के समर्थन में अमेरिका के साथ कदम मिलाकर चलने की कोशिश की, लेकिन ट्रंप के दोबारा चुने जाने के बाद से यूरोपीय संघ के सदस्य देशों का अमेरिका से काफी मतभेद हो गया है। वर्ष 2025 के दौरान, व्यापार और शुल्क, सोशल मीडिया विनियमन, पर्यावरण और कृषि नीतियों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच टकराव हुआ।
लेकिन हाल के घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका पर अब ग्रीनलैंड और डेनमार्क, यूरोपीय संघ और यूरोप के दीर्घकालिक सहयोगी के रूप में भरोसा नहीं किया जा सकता।
यह एक ऐसा संकट है जो कई देशों को अपनी चपेट में ले रहा है और जिसके कई कारण हैं। इस जटिल स्थिति को समझने के लिए, हम अकादमिक चिंतन से चार अलग-अलग विश्लेषणात्मक दृष्टिकोणों का उपयोग कर सकते हैं।
1. यथार्थवाद
वर्तमान में, सबसे लोकप्रिय दृष्टिकोण ‘‘यथार्थवाद’’ की रूढ़िवादी परंपरा से आता है। यह भविष्यवाणी करता है कि प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय हित में कार्य करेगा।
इस परिप्रेक्ष्य में, ट्रंप के कार्य एक बहुध्रुवीय दुनिया के उदय का हिस्सा हैं, जिसमें महाशक्तियां अमेरिका, चीन, भारत और रूस हैं। इस दुनिया में, रूस के लिए अमेरिका का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन पर आक्रमण करना, अमेरिका के लिए चीन का मुकाबला करने के लिए वेनेजुएला और ग्रीनलैंड में संपत्तियों पर कब्जा करना और चीन के लिए अमेरिका का मुकाबला करने के लिए ताइवान पर आक्रमण करना तर्कसंगत है।
2. नए अभिजात वर्ग
कई लोगों का मानना है कि ट्रंप की वापसी और व्लादिमीर पुतिन की विदेश नीतियों समेत पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं को समझने के लिए, आपको रूढ़िवादी या उदारवादी व्याख्याओं से परे जाकर यह पता लगाना होगा कि वैश्विक महाशक्तियों में सत्ता और प्रभाव किसके हाथ में है। इसका मतलब है कि धनी परिवार, निगम और कुलीन वर्ग जो मीडिया और चुनावी ताकत और वित्त के माध्यम से सत्ताधारी अभिजात वर्ग की राजनीति पर नियंत्रण रखते हैं।
वेनेजुएला और ग्रीनलैंड के मामलों में दो कारक काम कर रहे हैं – कानून के शासन को लेकर अमेरिका की अस्वीकृति और ऊर्जा संसाधनों के माध्यम से व्यक्तिगत संपत्ति अर्जित करने की लालसा। वेनेजुएला में जारी कार्रवाई कई महीनों में एकमात्र ऐसी घटना है जिसने एपस्टीन मामलों को खबरों में पीछे छोड़ दिया है।
3. उदारवादी व्यवस्था का पतन
कई अकादमिक व्याख्याएं इन हालिया घटनाओं को अमेरिका, यूरोप, ‘‘विकसित दुनिया’’ और संयुक्त राष्ट्र के प्रभुत्व वाली ‘‘उदारवादी व्यवस्था’’ के पतन के संदर्भ में देखती हैं। इस दृष्टिकोण से, पुतिन और ट्रंप के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के महत्व और पश्चिमी देशों द्वारा बहुपक्षवाद पर आधारित व्यवस्था के रूप में देखे जाने वाले अंतिम दिनों के रूप में देखा जाता है।
4. ग्रहीय दृष्टिकोण
अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दृष्टिकोण ग्रहीय राजनीति के दृष्टिकोण में पाया जाता है। यह दृष्टिकोण इस सरल अवलोकन पर आधारित है कि वैश्विक ताप वृद्धि, वन्यजीवों का बड़े पैमाने पर विलुप्त होना, बढ़ती निरंकुशता और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की वापसी जैसे कई ग्रहीय संकट आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं और इसलिए इन्हें एक साथ विचार करने पर ही समझा जा सकता है।
हालांकि, एक अंतिम बात पर जोर देना आवश्यक है। इन दृष्टिकोणों में से केवल एक ही दृष्टिकोण हमें हमारे वैश्विक राजनीतिक संकट से बाहर निकालने में सहायक हो सकता है।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र नेत्रपाल
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