(कैथरीन एम. रॉबर्टसन, मेलबर्न विश्वविद्यालय/ जैसिंटा हंफ्री, मेलबर्न विश्वविद्यालय/ हॉली किर्क, कर्टिन विश्वविद्यालय सारा बेकेसी/ आरएमआईटी विश्वविद्यालय)
मेलबर्न, 26 मार्च (द कन्वरसेशन) पार्क हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल हैं। ये खासकर उन माता-पिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जिनके बच्चे बहुत चंचल होते हैं, या उन कर्मचारियों के लिए जो शांतिपूर्ण जगह पर दोपहर का भोजन करना चाहते हैं।
लेकिन पार्क ऐसे स्थल भी हैं जहां संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं, खासकर उन जीवों के जरिए जिनमें हानिकारक रोगजनक होते हैं।
इसका कारण यह है कि अन्य सार्वजनिक स्थानों की तुलना में पार्क इस तरह बनाए जाते हैं कि लोग और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़ सकें।
पार्क में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। ये बीमारियां सीधे संक्रमित पशुओं के संपर्क से हो सकती हैं, या मच्छर, टिक और पिस्सू जैसे कीटों से भी फैल सकती हैं। कुछ बीमारियों के लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ गंभीर या जीवनभर असर डाल सकती हैं।
हमारे नए अध्ययन में यह देखा गया कि हम पार्क और हरे-भरे स्थानों पर किस तरह रहते हैं, और इससे हमारे बीमारी के संपर्क में आने की आशंका कैसे बढ़ सकती है। अच्छी बात यह है कि हम इस जोखिम को कम करने के तरीके अपना सकते हैं।
–पार्क और बीमारियों के बीच संबंध–
अगर आप नियमित रूप से पार्क जाते हैं, तो हमारे शोध से पता चलता है कि कुछ कारक आपके बीमारी के संपर्क में आने की आशंका बढ़ा सकते हैं। यहां तीन मुख्य कारण बताए गए हैं:
1. पालतू पशु
हमारे अध्ययन से पता चला है कि कुत्ते और बिल्लियों जैसे घरेलू जानवर बीमारियों का बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। जब ये पार्क या सार्वजनिक स्थल पर शौच करते हैं तो अक्सर मिट्टी और पानी को संक्रमित कर देते हैं।
पालतू पशुओं में ‘राउंडवर्म’ भी हो सकते हैं, जो एक लंबा, ट्यूब जैसा परजीवी है और जानवरों की आंत में रहता है। शोध से पता चलता है कि जिन पार्क में कुत्ते और बिल्लियां हों, वहां अधिक राउंडवर्म पाए जाते हैं।
यह विशेष रूप से चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक है, क्योंकि छोटे बच्चे अक्सर मिट्टी खाते हैं, जिससे उनके भीतर संक्रमित अंडे खाने का खतरा होता है।
2. खाद्य अपशिष्ट
खुले कूड़ेदान में पड़ी खाद्य सामग्री भी बीमारी का स्रोत हो सकती है। अगर इन्हें सही तरीके से फेंका नहीं जाता, तो ये चूहों और लोमड़ियों को आकर्षित कर सकती है, जिसकी वजह से हमारे पिकनिक स्थल संभावित बीमारी के केंद्र बन सकते हैं।
इसके अलावा, इससे डिंगो जैसे जानवर भी आकर्षित हो सकते हैं, जो आमतौर पर शहरों या उपनगरों में नहीं पाए जाते। इन जानवरों में अलग-अलग रोगजनक होते हैं और पार्क में आने वाले लोग इसकी वजह से नयी बीमारियों के संपर्क में आ सकते हैं।
3. रोग फैलाने वाले कीट और परजीवी
मच्छर और टिक आम रोग वाहक हैं। पार्क और हरे-भरे स्थानों में मच्छर मुख्य चिंता का कारण हैं क्योंकि ये अक्सर स्थिर पानी में पनपते हैं, जैसे कि छोटे तालाब या झील।
**मनुष्यों की भूमिका**
पार्क में रोग फैलने का कारण सिर्फ जानवर या कीट नहीं हैं, बल्कि मानव भी रोगजनक फैला सकते हैं। यह आम, लेकिन खतरनाक आदतों के जरिए होता है, जैसे कि पालतू जानवरों का मल न उठाना और खाद्य अपशिष्ट सही तरीके से नहीं फेंकना।
पक्षियों को दाना डालना भी नुकसानदेह हो सकता है। इससे इंसान और पक्षियों के बीच संपर्क बढ़ता है, और वैज्ञानिक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताते रहे हैं। यही कारण है कि अधिकारी आमतौर पर पक्षियों को खाना देने से मना करते हैं।
हम क्या कर सकते हैं?
पार्क हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं क्योंकि ये हमें प्रकृति के करीब समय बिताने का मौका देते हैं। इसलिए हमें सिर्फ बीमारी के डर से पार्क जाना नहीं छोड़ना चाहिए।
इसके बजाय, पार्क इस तरह से बनाए जाने चाहिए जो संक्रामक रोग के जोखिम को कम करें।
उदाहरण के लिए, खेल मैदान के चारों ओर बाड़बंदी कर सकते हैं, जिससे बच्चों और टिक के संपर्क को कम किया जा सके।
कुत्तों के लिए विशेष स्थान बनाए जा सकते हैं ताकि वे मिट्टी को मल या मूत्र से संक्रमित न करें।
खेल के मैदान के नीचे रेत की जगह ‘मल्च’ या रबड़ लगाना भी मददगार हो सकता है, जिससे बिल्लियां वहां शौच के लिए न जाएं।
पानी के स्रोतों में ‘ऑस्ट्रेलियन स्मेल्ट’ और ‘पैसिफिक ब्लू-आई’ जैसी मछलियां डाल सकते हैं, जो मच्छर के अंडे और लार्वा खा जाती हैं।
अधिक देसी पौधे लगाना भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि शोध से पता चला है कि विदेशी पौधे मच्छरों के पनपने के लिए मुफीद होते हैं।
मानव व्यवहार को बदलने के लिए सार्वजनिक शिक्षा महत्वपूर्ण है। हमें यह संदेश देना चाहिए कि जंगली जीवों को खाना न दें। पालतू जानवरों के मालिकों को उनके पशुओं की गंदगी साफ करने और माता-पिता को अपने बच्चों को मिट्टी खाने से रोकने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
–पार्क को सही नजरिए से देखें–
इस बात की कम संभावना है कि आपके स्थानीय पार्क या सामुदायिक बगीचे से कोई महामारी फैले। लेकिन फिर भी इन जगहों पर रोजाना जाने से आपको बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
सदियों से, मानव ने शहर इस तरह से बसाए हैं कि संक्रामक रोगों के जोखिम को कम किया जा सके। 19वीं सदी के लंदन में सीवेज नेटवर्क का निर्माण इसका उदाहरण है।
हमारा शोध नया है, लेकिन रोगों से लोगों को बचाने को ध्यान में रखकर शहर बनाने का विचार नया नहीं है। अब समय है कि इस विचार को पार्कों पर लागू किया जाए।
(द कन्वरसेशन)
जोहेब नरेश
नरेश