बेरूत, 14 अप्रैल (एपी) लेबनान के चरमपंथी समूह हिज्बुल्ला ने अमेरिका में लेबनान और इजराइल के बीच होने वाली प्रत्यक्ष वार्ताओं के परिणामस्वरूप होने वाले किसी भी समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। चरमपंथी समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
हिज्बुल्ला की राजनीतिक परिषद के उच्चस्तरीय सदस्य वाफिक सफा ने वाशिंगटन में लेबनान और इजराइल के राजदूतों के बीच संभावित वार्ताओं की पूर्व संध्या पर यह बात कही। दशकों में ऐसा पहली बार होगा जब दोनों देशों के राजदूत आमने-सामने बैठकर वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं।
सफा ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा, “लेबनान और दुश्मन इजराइल के बीच इस वार्ता के परिणामों की जहां तक बात है तो हम उनकी कतई परवाह नहीं करते और न ही हम इसे लेकर किसी तरह चिंतित हैं।”
उन्होंने विदेशी मीडिया से बात करते हुए कहा, “उनके बीच जो भी समझौता हो, वह हम पर बाध्यकारी नहीं होगा।”
संवेदनशील समय में ऐतिहासिक वार्ता—
लेबनानी अधिकारी इस वार्ता के जरिए इजराइल-हिज्बुल्ला संघर्ष में युद्धविराम कराने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि उनका लक्ष्य हिज्बुल्ला का निरस्त्रीकरण और लेबनान-इजराइल के बीच संभावित शांति समझौता है। नेतन्याहू की प्रवक्ता शोश बेद्रोसियन ने सोमवार को कहा कि हिज्बुल्ला के साथ कोई युद्धविराम नहीं होगा।
इसी बीच, पिछले सप्ताह पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता में ईरान ने अपने किसी भी संभावित युद्धविराम समझौते में लेबनान को शामिल करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका और इजराइल ने इसे खारिज कर दिया।
पिछले बुधवार तेहरान और वाशिंगटन द्वारा युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही इजराइल ने लेबनान में 100 से अधिक हवाई हमले किए, जिनमें मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले रिहायशी और व्यावसायिक इलाके भी शामिल थे।
हालांकि अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। सफा ने कहा कि हिज्बुल्ला को जानकारी दी गई है कि ईरान “बेरूत के पूरे प्रशासनिक क्षेत्र में हमलों को रुकवाने में सफल रहा है, जिसमें दक्षिणी उपनगर दहियेह भी शामिल है। दहियेह को हिज्बुल्ला का गढ़ माना जाता है।
बुधवार के बाद से बेरूत और उसके दक्षिणी उपनगरों पर इजराइली हमले रुके हुए हैं, लेकिन दक्षिणी लेबनान में भीषण संघर्ष जारी है।
एपी रवि कांत रवि कांत माधव
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