(लियोन गोल्डस्मिथ, ओटागो विश्वविद्यालय)
डुनेडिन (न्यूजीलैंड), 14 अप्रैल (द कन्वरसेशन) अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम वार्ता विफल होने के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब फारस की खाड़ी में स्थित महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करने का आदेश दिया है।
यह क्षेत्रीय संघर्ष का नवीनतम और सबसे संवेदनशील चरण है, जिसका वैश्विक प्रभाव और जड़ें काफी गहरी और जटिल हैं।
तेल और गैस के वैश्विक व्यापार की “मुख्य धमनी” माने जाने वाले इस मार्ग पर व्यापक विश्लेषण हुआ है, लेकिन होर्मुज क्षेत्र के अपने इतिहास और सामाजिक-राजनीतिक ढांचे पर कहीं कम ध्यान दिया गया है।
यह एक तरह की अनदेखी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के गहरे सांस्कृतिक पहलुओं को समझने से हमें यह अंदाजा मिल सकता है कि आगे क्या होने वाला है।
वास्तव में, जैसे 1956 का स्वेज संकट पुराने ब्रिटिश साम्राज्य के पतन का संकेत था, वैसे ही 2026 का होर्मुज संकट अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद किया जा सकता है।
तेल राजतंत्रों की उत्पत्ति—
बड़ी महाशक्तियों ने लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण पाने की कोशिश की है। 17वीं सदी की शुरुआत में पुर्तगालियों के निष्कासन के बाद, अगली साढ़े तीन शताब्दियों तक ब्रिटिश साम्राज्य इस क्षेत्र की प्रमुख बाहरी शक्ति बन गया।
‘पैक्स ब्रिटानिका’ (ब्रिटिश शांति) के इस लंबे दौर में, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाज—जो दक्षिण एशिया में ब्रिटेन के शाही क्षेत्रों के साथ संपर्क के लिए अनिवार्य थे—अक्सर स्थानीय हमलावरों का शिकार हो जाते थे। ये हमलावर अपनी तेज रफ्तार छोटी नावों में अचानक सामने आते और कोहरे भरी जटिल तटरेखाओं में पलक झपकते ही गायब हो जाते थे।
क्षेत्र की मानव और भौगोलिक परिस्थितियों को पूरी तरह न समझ पाने के कारण, ब्रिटिश लोगों ने तटों और आबादी का विस्तृत मानचित्रण शुरू किया। इसके आधार पर उन्होंने कुछ जनजातियों और शेखों को आर्थिक प्रोत्साहन देकर अपने पक्ष में करना शुरू किया।
उन्होंने ओमान के शक्तिशाली सुल्तान के साथ भी घनिष्ठ समन्वय किया, जिनका साम्राज्य फारस की खाड़ी से लेकर पूर्वी अफ्रीका के जांजीबार तक फैला हुआ था, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के अशांत समुदायों को नियंत्रित किया जा सके।
इससे पूर्वी अरब प्रायद्वीप में स्थानीय जनजातीय शासकों को समृद्ध करने की परंपरा स्थापित हुई, जो आगे चलकर 20वीं सदी में आधुनिक तेल आधारित राजशाहियों में परिवर्तित हो गई।
ब्रिटेन ने 19वीं सदी में जिन जनजातियों और कबीले को प्राथमिकता दी थी, वही आज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन और कुवैत के शासक परिवार हैं (जबकि सऊदी अरब का विकास अपेक्षाकृत स्वतंत्र रूप से हुआ)। इसका परिणाम यह हुआ कि होर्मुज से होकर तेल और गैस के वाणिज्यिक परिवहन के लिए दीर्घकालिक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित हो गया।
वर्ष 1971 के बाद, जब अमेरिका ने ब्रिटेन से फारस की खाड़ी की सुरक्षा जिम्मेदारी संभाली और तब तक पूर्वी अरब के देशों को औपचारिक स्वतंत्रता मिल चुकी थी, तो उसने इन्हीं मौजूदा शासक परिवारों पर ध्यान केंद्रित किया। क्षेत्र की जटिल सामाजिक संरचना के अन्य पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
इसी दौरान, खाड़ी के दोनों ओर के स्थानीय शासकों ने संकीर्ण राष्ट्रवाद विकसित किया, जो अरब सुन्नी इस्लामिक (ओमान को छोड़कर, जो आंशिक रूप से इबादी है) और फारसी शिया इस्लाम की पहचान पर आधारित था। इसका संयुक्त प्रभाव राजनीतिक और सांस्कृतिक एकरूपता का भ्रम पैदा करना था।
इसके बावजूद दोनों तटों पर अत्यंत विविध समुदाय आज भी रहते हैं। खाड़ी और होर्मुज जलसंधि के उत्तरी तट पर बड़ी संख्या में अरब और बलूच समुदाय रहते हैं, जिनके ईरान के प्रभुत्व वाले शासन (और पाकिस्तान के साथ भी) लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं।
होर्मुज के दक्षिणी तट के समुदायों के बारे में और भी कम जानकारी है, जिनमें ओमान का मुसंदम प्रांत शामिल है, जो अरब प्रायद्वीप के सिरे पर खाड़ी में आगे की ओर निकला हुआ है और हार्मुज जलडमरूमध्य का निर्माण करता है।
यह क्षेत्र ओमान के मुख्य भूभाग से केवल फेरी के माध्यम से ही सीधे पहुंचा जा सकता है। यहां द्वीपों का जटिल समूह और खड़ी ढलानों वाले फियोर्ड (पहाड़ों के बीच का समुद्री भाग) हैं, और यह दक्षिण व पश्चिम से यूएई से घिरा हुआ है।
यहां के कुछ मूल निवासी कुमज़ारी नामक एक विशिष्ट भाषा बोलते हैं, जिसमें अरबी और फारसी के तत्व शामिल हैं। ये द्वीपीय समुदाय सदियों से समुद्र के साथ गहरे सहजीवी संबंध में, लगभग अनजान जीवन जीते आए हैं।
उदाहरण के लिए, कुमज़ारी लोगों के लिए दिशा का मुख्य आधार उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम नहीं, बल्कि “ऊपर” (बाला) और “नीचे” (जेरिन) है -जैसा कि एक मछुआरा पहाड़ों के सापेक्ष समुद्र की गहराई को समझता है।
जब मैंने 2019 में यहां का दौरा किया, तो मैंने देखा कि कई मुसंदम निवासी अपनी ओमानी राष्ट्रीयता के प्रति कम प्रतिबद्ध नजर आते हैं। कई लोग अमीराती “दिश दशा” (सफेद पारंपरिक पोशाक) पहनते हैं, जो खाड़ी देशों की अलग-अलग राष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है।
इसी कारण मुसंदम के निवासियों को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें सामाजिक कल्याण सहायता भी शामिल है, जो अन्य प्रांतों में उपलब्ध नहीं है-ताकि उन्हें ओमान की राजधानी मस्कट के प्रति वफादार बनाए रखा जा सके।
स्थानीय ताकतें, वैश्विक तनाव—
इन सभी बातों का वर्तमान संकट पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है। एक ओर, ईरान के भीतर आंतरिक अशांति और इजराइल तथा अब अमेरिका के बाहरी हमलों के चलते ईरानी राष्ट्र की वैचारिक वैधता लगातार कमजोर होती जा रही है। तेहरान में सत्ता अब ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक छोटे से समूह तक सिमट गई है। राजकीय संस्थाओं की इस कमजोरी से उप-राष्ट्रीय पहचान के उभरने और एकजुट होने की संभावना बढ़ती है जिसमें होर्मुज जलसंधि के आसपास रहने वाले समुदाय शामिल हैं।
दूसरी ओर, ईरान और युद्ध को लेकर ओमान तथा यूएई के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। जहां यूएई तेहरान के प्रति आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं ओमान-जो लंबे समय से खाड़ी का सबसे भरोसेमंद तटस्थ मध्यस्थ रहा है-उस पर होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल प्रणाली लागू करने की योजना में ईरान के साथ शामिल होने का आरोप लगा है। हालांकि ओमान ने इसे सख्ती से खारिज किया है।
अंततः, मुसंदम प्रायद्वीप पर ओमान का नियंत्रण और ईरान के साथ उसकी निकटता, यूएई की राजधानी अबू धाबी के साथ असहज तनाव पैदा करती है।
यह संभावना वास्तविक है कि यूएई स्थानीय पहचान की राजनीति का फायदा उठाकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुसंदम प्रायद्वीप को अपने नियंत्रण में लाने की कोशिश करे। हालांकि, अमेरिका और अन्य खाड़ी देश इसमें हस्तक्षेप करेंगे या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
ओमान इस संभावना को लेकर बेहद संवेदनशील है। वर्ष 2019 में मस्कट में एक विश्वविद्यालय की संगोष्ठी के दौरान, एक नक्शे में मुसंदम को ओमान का हिस्सा न दिखाने पर दर्शकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
विस्तृत रूप से देखें तो होर्मुज जलडमरूमध्य का भविष्य बदलती वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक है। साल 1956 में ब्रिटेन ने स्वेज नहर के जरिए अपने साम्राज्यवादी हितों को बचाने की कोशिश करते हुए उभरते अरब राष्ट्रवाद और बदलती विश्व व्यवस्था को समझने में गलती की थी।
अब अमेरिका के सामने भी यही जोखिम है और वह होर्मुज जलडमरूमध्य में इसी तरह की गलती दोहरा रहा है और बदलती दुनिया में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने में विफल हो रहा है।
(द कन्वरसेशन) रवि कांत रवि कांत वैभव
वैभव