युद्ध और प्रतिबंध किस तरह रूस के विशाल इलाके के शासन के तरीके को बदल रहे हैं
युद्ध और प्रतिबंध किस तरह रूस के विशाल इलाके के शासन के तरीके को बदल रहे हैं
( सोफिया बोरुश्किना, मोनाश यूनिवर्सिटी )
मेलबर्न, 16 सितंबर (द कन्वरसेशन) दुनिया के सबसे बड़े देश रूस के सामने अपने विशाल भूभाग में आर्थिक गतिविधियों, बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने की चुनौती हमेशा से रही है। कुल 11 समय क्षेत्रों (टाइम जोन) में फैले और 14 देशों के साथ सीमा साझा करने वाले रूस के लिए यह चुनौती यूक्रेन के खिलाफ साढ़े चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक संपर्कों में आए व्यवधान के कारण और बढ़ गई है।
इन बढ़ते दबावों का असर रूस की राष्ट्रीय स्थानिक विकास नीति में भी दिखाई देने लगा है।
शोधकर्ताओं ने रूस की 2019 और 2024 की स्थानिक विकास रणनीतियों की तुलना करते हुए कहा है कि दोनों नीतियों के बीच क्षेत्रीय नियोजन के प्रति सरकार के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। इन रणनीतियों से यह पता चलता है कि सरकार किन क्षेत्रों में विकास की उम्मीद करती है, किन स्थानों को समर्थन देना चाहती है और इसके पीछे उसका उद्देश्य क्या है।
2019 की राष्ट्रीय स्थानिक नीति में 41 बड़े शहरी समूहों को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाने पर जोर था। इसके विपरीत, पांच साल बाद तैयार की गई नई रणनीति में देशभर में 2,160 ‘सहायक बस्तियों’ (सपोर्ट सेटलमेंट्स) की पहचान की गई। इनका उद्देश्य आबादी को बनाए रखना, आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना और देश के विभिन्न हिस्सों के बीच क्षेत्रीय निरंतरता बनाए रखना है।
रूस की 2019 की रणनीति उस दौर की सोच पर आधारित थी, जिसमें लोगों और आर्थिक गतिविधियों को बड़े और बेहतर ढंग से जुड़े शहरों में केंद्रित करना राष्ट्रीय समृद्धि का रास्ता माना जाता था।
शहरी समूह से आशय आम तौर पर ऐसे बड़े शहर और उनसे जुड़े आसपास के इलाकों से होता है, जो रोजगार, परिवहन और सेवाओं के माध्यम से आपस में जुड़े होते हैं। 2019 की रणनीति में ऐसे 41 समूहों की पहचान की गई थी और उनसे निवेश, प्रौद्योगिकी तथा आबादी को केंद्रित करने की उम्मीद की गई थी।
हालांकि, इस मॉडल के लिए निवेश की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच और पूंजी, प्रौद्योगिकी तथा लोगों की अपेक्षाकृत स्वतंत्र आवाजाही जैसी परिस्थितियां जरूरी थीं। 2019 की रणनीति में भी प्रतिस्पर्धा, अंतरराष्ट्रीय एकीकरण और वैश्विक आर्थिक नेटवर्क से जुड़ाव को विकास के महत्वपूर्ण तत्व माना गया था।
लेकिन 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद इन धारणाओं को बनाए रखना अधिक मुश्किल हो गया।
रूस-यूक्रेन संघर्ष के पूर्ण युद्ध में बदलने के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध बढ़े, विदेशी निवेश में कमी आई, व्यापार और लॉजिस्टिक्स बाधित हुए तथा रूस के आर्थिक संबंध यूरोप से हटकर एशियाई बाजारों की ओर अधिक केंद्रित होने लगे।
इसके साथ सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता भी सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में अधिक महत्वपूर्ण हो गईं। ये दबाव जनसंख्या में लंबे समय से जारी गिरावट और विभिन्न क्षेत्रों के बीच बड़े आर्थिक एवं सामाजिक अंतर जैसी समस्याओं के साथ जुड़ गए।
इस माहौल में पहले अपेक्षाकृत कम महत्व रखने वाला ‘सहायक बस्तियों’ का विचार रूस की 2024 की स्थानिक विकास रणनीति का प्रमुख आधार बन गया। नई रणनीति कुछ दर्जन बड़े विकास केंद्रों पर मुख्य रूप से ध्यान देने के बजाय देश के कहीं अधिक व्यापक हिस्से को कवर करने की कोशिश करती है।
इन 2,160 सहायक बस्तियों की प्रकृति एक जैसी नहीं है। इनमें से अधिकतर आसपास के क्षेत्रों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, जबकि कुछ में सीमा सुरक्षा, वैज्ञानिक गतिविधियों या रणनीतिक बुनियादी ढांचे से संबंधित भूमिकाएं हैं।
नयी रणनीति में उन क्षेत्रों को भी अधिक स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है जिन्हें सरकार संवेदनशील मानती है। ‘भू-रणनीतिक क्षेत्रों’ की विस्तारित श्रेणी में कैलिनिनग्राद, सुदूर पूर्व, उत्तरी काकेशस और आर्कटिक क्षेत्र शामिल हैं। इसमें उन देशों से लगती सीमाओं वाले नगर निकाय भी शामिल हैं जिन्हें रूस ‘मित्र नहीं’ मानता है, जिनमें मुख्य रूप से यूरोपीय संघ के सदस्य देश आते हैं।
व्यापार और लॉजिस्टिक्स गलियारों को एशियाई बाजारों की ओर मोड़ने के साथ यह बदलाव उन क्षेत्रों की विकास संभावनाओं को भी बदल रहा है, जिनकी अर्थव्यवस्था पहले यूरोप से निकटता पर आधारित थी। जो स्थान पहले यूरोप के लिए प्रवेश द्वार के रूप में पेश किए जाते थे, वे अब सीमा या बाहरी किनारे के रूप में देखे जा रहे हैं।
रूसी शब्द ‘ओपॉर्नी पंक्ट’ का यहां ‘सहायक बस्ती’ के रूप में अनुवाद किया गया है। स्थानिक नियोजन के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में इसका कोई सीधा समकक्ष नहीं है। सामान्य तौर पर इस शब्द का इस्तेमाल सैन्य और पुलिस व्यवस्था में ऐसे स्थान के लिए किया जाता है जो किसी क्षेत्र में नियंत्रण या मौजूदगी बनाए रखने में मदद करता है।
यह संदर्भ रूस की 2024 की रणनीति को समझने में मदद करता है। सहायक बस्तियों का उद्देश्य बड़े शहरी समूहों की तुलना में कहीं व्यापक नेटवर्क में आबादी और आवश्यक सेवाओं की मौजूदगी बनाए रखना है।
इसका व्यावहारिक उद्देश्य यह है कि जहां आर्थिक विकास कमजोर है, वहां भी स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे तक लोगों की पहुंच बनी रहे। साथ ही, इससे देश के उन हिस्सों में सरकारी मौजूदगी कायम रखने में मदद मिलती है जहां केवल आर्थिक मानकों के आधार पर सरकार की मौजूदगी कम हो सकती थी।
स्थानीय निवासियों के लिए इसके फायदे और सीमाएं दोनों हैं। छोटे शहर में स्कूल, क्लिनिक और सड़क को चालू रखना निश्चित रूप से एक लाभ है, जिसकी गारंटी बड़े शहरों पर केंद्रित नीति में नहीं थी।
लेकिन आवश्यक सेवाओं को बनाए रखना रोजगार पैदा करने, आय बढ़ाने या सामाजिक उन्नति के अवसरों का विस्तार करने के समान नहीं है। 1,500 से अधिक सहायक बस्तियों में पहले से ही जीवन स्तर लगातार निम्न बना हुआ है। ऐसे में नयी नीति के तहत कई दूरदराज के इलाकों में स्थिति के और खराब न होने को ही सफलता का एक स्वीकार्य पैमाना मानने का जोखिम है।
व्यापक रूप से देखा जाए तो रूस का उदाहरण यह दर्शाता है कि नीतिगत मॉडल अक्सर सार्वभौमिक प्रतीत होते हैं, क्योंकि उनके पीछे मौजूद परिस्थितियों को स्वाभाविक मान लिया जाता है।
द कन्वरसेशन मनीषा नरेश
नरेश

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