तोशखाना भ्रष्टाचार मामले में इमरान ने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में दी चुनौती

तोशखाना भ्रष्टाचार मामले में इमरान ने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में दी चुनौती

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  • Publish Date - July 7, 2023 / 05:05 PM IST,
    Updated On - July 7, 2023 / 05:05 PM IST

इस्लामाबाद, सात जुलाई (भाषा) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने तोशखाना भ्रष्टाचार मामले में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।

याचिका में उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें निचली अदालत को एक हफ्ते के अंदर तोशखाना भ्रष्टाचार मामले की पोषणीयता पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया गया है।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हुमायूं दिलावर ने 10 मई को तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में 70 वर्षीय खान को दोषी ठहराया था, जिन्होंने मामले की स्वीकार्यता के बारे में आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

खान ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के समक्ष मामले की स्वीकार्यता को चुनौती दी थी, जिसने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया था।

उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा था कि निचली अदालत ने कमजोर आधार पर खान की याचिका खारिज कर दी थी।

पीठ ने निचली अदालत से खान की याचिका को लंबित मानने को कहा।

‘द डॉन अखबार’ की खबर के मुताबिक, खान ने अपनी याचिका में दलील दी कि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उसी न्यायाधीश को मामला सौंपकर न्यायिक क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि की है, जिसके खिलाफ एक अर्जी दाखिल करके मामले को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।

वरिष्ठ वकील ख्वाजा हैरिस अहमद के माध्यम से दायर की गई खान की याचिका में अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) दिलावर के समक्ष कार्यवाही पर तब तक रोक लगाने का अनुरोध किया गया है, जब तक कि शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अपील पर कोई फैसला नहीं आ जाता।

इमरान को मिले राजकीय उपहार की बिक्री को लेकर पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने पूर्व प्रधानमंत्री को ‘झूठे बयान और गलत घोषणा’ करने के लिए अयोग्य ठहरा दिया था जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय मुद्दा बन गया।

पिछले साल 21 अक्टूबर को ईसीपी ने अनुच्छेद 63 (एक) (पी) के तहत तोशखाना मामले में इमरान को अयोग्य ठहराया था।

इमरान खान फिलहाल 140 से अधिक मामलों का सामना कर रहे हैं जिसमें आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार और हत्या जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।

भाषा संतोष मनीषा

मनीषा