सियोल (दक्षिण कोरिया), 25 जून (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया को पोत निर्माण, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अधिक घनिष्ठ सहयोग करना चाहिए।
वह दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप पर आयोजित ‘जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक एवं तकनीकी साझेदारी, राजनीतिक एवं रणनीतिक सहयोग तथा जन संपर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
जयशंकर ने कहा, “भारत और कोरिया गणराज्य को और करीब से सहयोग करना चाहिए। पोत निर्माण, डिजिटल, स्वास्थ्य, अवसंरचना और रक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच मौजूद संभावनाओं का पूरी तरह उपयोग किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि प्रभावशाली देशों को, वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने और साझा समस्याओं के समाधान के लिए नए समझौतों और सहयोगात्मक संबंधों को बढ़ावा देना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) को अधिक क्षमता और अवसर दिए जाने चाहिए, जिससे वैश्विक विकास के नए रास्ते खुल सकें।
उन्होंने कहा कि कुछ देशों के हितों को खुले तौर पर प्राथमिकता दिए जाने से व्यापक समुदाय पर उसका असर पड़ता है और कुछ देशों पर कम विचार किया जाता है, जिसे अधिक सहयोग के माध्यम से संतुलित करने की आवश्यकता है।
जयशंकर ने कहा कि महामारी, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे सीमाओं में सीमित नहीं रहते, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की-मून और मंगोलिया के पूर्व प्रधानमंत्री गोम्बोजाव ज़ंदनशातार से भी मुलाकात की।
इससे पहले बुधवार को उन्होंने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश और वित्त जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह वार्ता अप्रैल में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित थी।
भाषा मनीषा वैभव
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