सिंगापुर, 25 जून (भाषा) भारत के उच्चायोग ने बुधवार शाम कहा कि वह सिंगापुर की तीन कंपनियों के उन श्रमिकों के संपर्क में है, जिन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। उच्चायोग प्रभावित श्रमिकों को सहायता उपलब्ध कराने में जुटे नेशनल ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस (एनटीयूसी) और श्रम मंत्रालय के साथ भी लगातार संपर्क बनाए हुए है।
एसके इंडस्ट्रीज, केपीए इंजीनियरिंग और वीवीआर प्लांट इंजीनियरिंग नामक कंपनियों ने भारत और बांग्लादेश के 400 से अधिक श्रमिकों को बिना वेतन और आवास के, उनके हाल पर छोड़ दिया है।
समाचार पत्र ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की एक खबर के अनुसार, इन तीनों कंपनियों के साझा निदेशक की पहचान भारतीय नागरिक रामू पलानी वेलू के रूप में हुई है।
खबर में कहा गया है कि कॉर्पोरेट खुफिया मंच ‘सयारी’ पर की गई खोज से पता चलता है कि रामू सिंगापुर में सात कंपनियों के निदेशक हैं। इन कंपनियों को एयर कंडीशनिंग, प्लंबिंग और भवन सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
सिंगापुर के स्थायी निवासी रामू के बारे में कहा जा रहा है कि वह देश छोड़कर जा चुके हैं।
एनटीयूसी के महासचिव एनजी ची मेंग, प्रवासी श्रमिक केंद्र के प्रतिनिधियों तथा श्रम राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने बुधवार को प्रभावित श्रमिकों से मुलाकात की। उन्होंने श्रमिकों को नकद सहायता, सुपरमार्केट वाउचर, आवास और रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
श्रमिकों को नकदी और सुपरमार्केट वाउचर के रूप में 200 सिंगापुरी डॉलर की मदद दी गई है। उनके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जा रही है और रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इन श्रमिकों ने सोमवार को श्रम मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि एयर कंडीशनर रखरखाव सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी केपीए इंजीनियरिंग और उससे संबद्ध फर्म एसके इंडस्ट्रीज में उनके नियोक्ताओं से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
मीडिया खबरों के अनुसार, श्रम मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह संभावित श्रम कानून उल्लंघनों के आरोपों को लेकर केपीए इंजीनियरिंग और एसके इंडस्ट्रीज की जांच कर रहा है।
भाषा खारी मनीषा
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