बाढ़ प्रभावित नेपाल में भारत-चीन की मदद से पुलों के पुनर्निर्माण, सड़क संपर्क बहाल करने की कोशिश तेज

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बाढ़ प्रभावित नेपाल में भारत-चीन की मदद से पुलों के पुनर्निर्माण, सड़क संपर्क बहाल करने की कोशिश तेज

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 01:17 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 01:17 PM IST

(फाइल फोटो के साथ जारी)

काठमांडू, आठ सितंबर (भाषा) विनाशकारी बाढ़ से टूटे महत्वपूर्ण सड़क मार्गों को बहाल करने में जुटे नेपाल ने आपदा प्रभावित इलाकों में अलग-थलग पड़े समुदायों को फिर से जोड़ने के लिए भारत और चीन से अस्थायी पुल मुहैया कराने का अनुरोध किया है।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, 26 अगस्त को आई आपदा में सोमवार तक 1,356 लोगों की मौत हो गई जबकि 4,994 लोग अब भी लापता हैं। अब तक कुल 13,396 लोगों को बचाया गया है।

चट्टानों के खिसकने एवं हिमस्खलन के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ से भोटेकोशी नदी में पानी का तेज बहाव आया जिसमें उत्तरी और मध्य नेपाल में मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने भारत और चीन दोनों से अस्थायी पुल देने का अनुरोध किया है और दोनों देशों ने इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

‘द काठमांडू पोस्ट’ की मंगलवार की खबर के अनुसार, चीन मुस्तांग में कोरला सीमा चौकी पर 100-100 मीटर लंबे दो ‘बेली ब्रिज’ (अस्थायी इस्पात पुल) पहले ही भेज चुका है।

खबर में कहा गया कि सड़क विभाग ने सड़कों और पुलों को करीब 30 अरब नेपाली रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया है, जबकि इनके पुनर्निर्माण पर करीब 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने की संभावना है।

बाढ़ में रसुवा और चितवन के बीच 41 पुल नष्ट हो गए और चार अन्य आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इस मार्ग पर मौजूद 63 पुल में से केवल 18 ही सुरक्षित बचे हैं।

बाढ़ के कारण कई महत्वपूर्ण सड़क मार्ग नष्ट हो गए। रसुवा में आपदा के कारण नुवाकोट से सड़क संपर्क टूट गया, जबकि फुरके खोला पर बना कंक्रीट का पुल नष्ट हो जाने से धादिंग जिले के मुख्यालय धादिंगबेसी और पृथ्वी राजमार्ग के बीच सीधा संपर्क भी कट गया।

‘काठमांडू पोस्ट’ ने सड़क विभाग के उपमहानिदेशक एवं प्रवक्ता शुभराज न्यौपाने के हवाले से बताया कि विभाग ने बाढ़ में बहे सड़क मार्गों को साफ करने का काम शुरू कर दिया है ताकि अस्थायी पुल लगाए जा सकें।

खबर के अनुसार, नेपाली सेना नुवाकोट के देवीघाट में अलग से एक ‘एक्रो ब्रिज’ (अस्थायी मॉड्यूलर पुल) लगा रही है।

भौतिक अवसंरचना एवं परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील बाबू ढकाल ने बताया कि सड़क विभाग के पास 48 मीटर तक लंबे 11 ‘बेली ब्रिज’ हैं, लेकिन उन्हें क्षतिग्रस्त स्थानों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती है क्योंकि कई स्थानों तक जाने वाली सड़कें भी बाढ़ में बह गई हैं।

खबर के अनुसार, भारत ने भी नेपाल को ‘बेली ब्रिज’ उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

इस बीच, बुनियादी ढांचे को हुए व्यापक नुकसान से बचाव एवं राहत कार्यों की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। अधिकारियों को बाढ़ के पानी से बरामद शवों की पहचान करने में भी दिक्कत हो रही है।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, सोमवार तक केवल 98 शवों की पहचान कर उन्हें परिवारों को सौंपा जा सका।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा