(तस्वीरों के साथ)
ऑकलैंड, 11 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और न्यूजीलैंड के उनके समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को हुई बातचीत में शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए मिलकर काम करने का संकल्प जताया। भारत और न्यूजीलैंड ने शनिवार को अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने के साथ ही 2030 तक अपने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया।
दोनों नेताओं की बैठक में 18 ठोस परिणाम सामने आए, जिनमें 10 समझौतों पर हस्ताक्षर शामिल हैं। इनमें सबसे अहम हैं-कुल मिलाकर संबंधों को बढ़ाने के लिए चार साल की रूपरेखा और तीन जरूरी समझौते, जिनका मकसद ‘जल विज्ञान’ के आंकड़े साझा करने को बढ़ावा देना, आपसी नौसैनिक संबंधों को आसान बनाना और हिंद-प्रशांत में समुद्री सहयोग को और बेहतर बनाना।
बातचीत का एक मुख्य विषय मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करके द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना भी था, जिस पर न्यूजीलैंड की ओर से अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता ने जोर दिया।
संयुक्त बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर विचार-विमर्श किया तथा स्वतंत्र, खुले एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा के महत्व पर भी जोर दिया।
बयान के अनुसार, दोनों प्रधानमंत्रियों ने समुद्री नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा समुद्रों के अन्य वैध उपयोगों को सुनिश्चित करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह सब अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, 1982 के अनुरूप होना चाहिए।
शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत के लिए मिलकर काम करने का दोनों देशों का यह संकल्प ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के प्रदर्शन को लेकर दुनिया भर में चिंताएं बढ़ रही हैं; इनमें इस हफ्ते की शुरुआत में चीन द्वारा पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण को लेकर जताई गई आशंकाएं भी शामिल हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपनी प्राथमिकता के तहत दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर भी सहमति जताई ताकि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान को और मजबूत किया जा सके।
खेल के क्षेत्र में भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक संयुक्त कार्ययोजना को भी अंतिम रूप दिया गया। इसमें उच्चस्तरीय खेल प्रदर्शन, खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के क्षेत्रों में सहयोग की व्यवस्था है।
प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया व ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी करने के बाद तीन देशों की अपनी यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में शुक्रवार रात न्यूजीलैंड पहुंचे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और आक्रामक रुख की पृष्ठभूमि में आपसी सहयोग को और मजबूत करना है।
यह यात्रा हाल में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर के बाद हो रही है।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री से वार्ता के दौरान मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड, दोनों समुद्री राष्ट्र हैं और दोनों के बीच गहरा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नयी मजबूती प्रदान करेगा।
बातचीत के बाद मोदी ने कहा, “हमने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। हम स्पष्ट लक्ष्यों और ठोस नतीजों के साथ हर क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे।”
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से सामुद्रिक कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस),1982 के अनुरूप समुद्री मार्गों पर नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा समुद्र के अन्य वैध उपयोग सुनिश्चित किए जाने का आह्वान किया।
बैठक में अपनी बात रखते हुए मोदी ने कहा कि समुद्र से जुड़े देश होने के नाते भारत और न्यूजीलैंड के बीच गहरा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नयी ताकत का संचार करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘दो समुद्री देशों के रूप में हमारा घनिष्ठ सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नयी शक्ति प्रदान करता है और हमारे संबंध शांति के साझा लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों में नयी ऊर्जा भर सकते हैं।’’
दोनों प्रधानमंत्रियों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
फिलहाल, भारत और न्यूजीलैंड के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा लगभग 18,000 करोड़ रुपये है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास हमें स्वाभाविक साझेदार बनाता है। इसके अलावा, दो समुद्री राष्ट्रों के तौर पर, हमारा करीबी सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र को नयी मजबूती देता है और हमारे रिश्ते शांति के लक्ष्यों को हासिल करने में नयी ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि मेरी इस यात्रा से हमारे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे और वैश्विक शांति, स्थिरता व सुरक्षा में हमारा योगदान और बढ़ेगा। हम एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं, शांति की वकालत कर सकते हैं और शांति के माध्यम से वैश्विक कल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”
संयुक्त बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में फिर से बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
बयान में कहा गया है, ‘‘उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री नौवहन और वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही पूरी तरह बहाल करने का भी आह्वान किया और समुद्री परिवहन में किसी भी प्रकार की बाधा का विरोध किया।’’
दोनों नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के जरिए ही संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने संयुक्त राष्ट्र में ‘‘व्यापक और प्रभावी’’ सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
इस संबंध में, न्यूजीलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार और विस्तार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया।
दोनों नेताओं ने स्थिर, पारदर्शी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क को अधिक सुदृढ़ और लचीला बनाने में भारत की ‘‘महत्वपूर्ण भूमिका’’ को स्वीकार किया।
संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों में आने वाली बाधाओं के प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति मार्गों की स्थिरता इस पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।’’
दोनों पक्षों ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिलाया कि प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्थाएं इन आपूर्ति मार्गों पर काफी हद तक निर्भर हैं। साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वहां बिजली उत्पादन, समुद्री परिवहन, सड़क परिवहन, कृषि और मत्स्य पालन की लागत लगातार बढ़ रही है।
यूक्रेन युद्ध पर प्रधानमंत्री मोदी और लक्सन ने जारी संघर्ष पर चिंता व्यक्त की। संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने कहा कि यह युद्ध भारी मानवीय पीड़ा और वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव पैदा कर रहा है।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों, विशेषकर सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद की एक बार फिर कड़ी निंदा की।
उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और पिछले वर्ष लालकिले के निकट हुए आतंकी हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की तथा जोर देकर कहा कि इन हमलों के जिम्मेदार लोगों को कानून के कठघरे में लाया जाना चाहिए और उन्हें उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद को ‘‘बिल्कुल न बर्दाश्त करने’’ की नीति अपनाने का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के वित्तपोषण के नेटवर्क को ध्वस्त करना तथा आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करना बेहद आवश्यक है।
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
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