भारत-रूस व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत

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भारत-रूस व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 11:13 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 11:13 PM IST

मॉस्को, 24 अगस्त (भाषा) भारत और रूस ने सोमवार को व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। यह फैसला विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई मुलाकात और अन्य प्रमुख नेताओं के साथ हुई बातचीत के दौरान लिया गया।

जयशंकर रूस की दो-दिवसीय यात्रा के तहत रविवार को मॉस्को पहुंचे। यह यात्रा 12-13 सितंबर को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नयी दिल्ली दौरे से पहले हो रही है।

जयशंकर ने मॉस्को में रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी) की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की।

इन बैठकों को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि भारत और रूस कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

पुतिन से मुलाकात में जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश और शुभकामनाएं उन तक पहुंचाईं। उन्होंने कहा कि मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में पुतिन से मिलने और फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।

जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में आपसे मिलने, फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में आपका स्वागत करने और बाद में आप दोनों की आपसी सुविधा के अनुसार आपके साथ सालाना शिखर बैठक करने के लिए उत्सुक हैं।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु तथा अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग काफी आगे बढ़ा है। मुझे इस पर विस्तार से बात करने में खुशी होगी। कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि हमारे बीच आर्थिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है।”

जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुई आईआरआईजीसी बैठक में उन्हें आर्थिक सहयोग के संबंध में “अच्छी रिपोर्ट” मिली।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास की खबर के मुताबिक, पुतिन ने कहा कि रूस, भारत को उर्वरकों की आपूर्ति बढ़ा रहा है और वह ऐसा करते रहने के लिए तैयार है।

खबर में पुतिन के हवाले से कहा गया है, “हम भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हम आपूर्ति बढ़ा रहे हैं और आगे ऐसा करते रहने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने कहा कि पिछले साल थोड़ी गिरावट के बाद इस वर्ष रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ा है।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि इस साल हमारे बीच व्यापार बढ़ा है। पिछले वर्ष इसमें थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है।”

पुतिन ने कहा कि जयशंकर की यात्रा से रूस और भारत के बीच दशकों से बने रिश्तों की गहराई का पता चलता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग सभी क्षेत्रों में सहयोग जारी है, जिसमें सरकारों, संसदों और व्यापार जगत के स्तर पर सहयोग भी शामिल है।

पुतिन और जयशंकर की बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी मौजूद थे।

जयशंकर ने 27वीं आईआरआईजीसी बैठक में पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2025-26 में चार गुना बढ़कर लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।

हालांकि, उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार में तेजी से हुई बढ़ोतरी के साथ-साथ व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ गया है, जो 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।

जयशंकर ने कहा, “इस असंतुलन को दूर करना आज हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।”

उन्होंने कहा कि बाजार तक पहुंच बढ़ाने, शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को हटाने, भुगतान तंत्र को मजबूत करने तथा कारोबार-से-कारोबार स्तर पर बेहतर जुड़ाव की दिशा में प्रगति इस असंतुलन को दूर करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए अहम होगी।

जयशंकर ने अंतर-सरकारी आयोग के कामकाज में कार्यान्वयन और निष्कर्षों पर ज्यादा ध्यान देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कारोबारियों के साथ मजबूत जुड़ाव की वकालत करते हुए कहा कि सरकारें तो बस काम करने के लिए सही माहौल या ढांचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन असल में कारोबार ही “व्यापार, निवेश, नवाचार और रोजगार पैदा करने” का काम करते हैं।

उन्होंने अवसरों के बारे में अपनी दृष्टिकोण को लगातार अद्यतन करने और नयी संभावनाओं को तलाशने पर भी जोर दिया।

जयशंकर ने कहा, “जटिल अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार नये विचार सामने लाएंगे, क्योंकि हम सभी जोखिम कम करने और विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “आर्थिक और तकनीकी जरूरतें भी इसमें जुड़ेंगी। इनके बीच एक बुनियादी पूरकता है, जिसे अभी पूरी तरह से नहीं समझा गया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस क्षमता को साकार करने की दिशा में प्रगति हुई है और हमें इसे आगे बढ़ाना होगा।”

जयशंकर ने कहा, “भारत-रूस साझेदारी ने लगातार मजबूती और हालात के अनुसार ढलने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।”

उन्होंने कहा, “जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के बावजूद हमारे आपसी रिश्ते लगातार प्रगाढ़ होते गए हैं। यह उस आपसी हित और भरोसे को दर्शाता है, जो हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की पहचान है।”

पुतिन के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि उन्हें रूसी राष्ट्रपति से मिलकर खुशी हुई।

विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक निजी संदेश उन्हें (पुतिन को) सौंपा। उन्हें 27वीं आईआरआईजीसी-टीईसी के तहत हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी, जिसमें कई क्षेत्रों में हमारे सहयोग की समीक्षा की गई। इस मामले में उनके मार्गदर्शन को हम महत्व देते हैं। साथ ही, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश