वाशिंगटन, 26 अगस्त (भाषा) भारत और अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर बुधवार को चर्चा की।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजित कुमार मोहंती ने यहां अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के साथ बातचीत की। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की समुद्री अनुप्रयोग के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी लाइसेंस (एटीएलएएस) पहल की मंत्रिस्तरीय शुरुआत से पहले हुई।
परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव मोहंती आईएईए की इस पहल की शुरुआत के लिए अमेरिका में हैं। इस पहल के तहत नागरिक जहाजों को बिजली देने के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के इस्तेमाल की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा।
परमाणु ऊर्जा विभाग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दोनों देशों के बीच बातचीत में द्विपक्षीय असैन्य परमाणु क्षेत्र में जारी घटनाक्रम तथा दोनों देशों के पारस्परिक लाभ के लिए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग को और मजबूत करने के वास्ते नीतिगत उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया।’’
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत ने अपने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया है और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की कई अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय बाजार में रुचि दिखाई है और निवेश तथा साझेदारी के अवसर तलाश रही हैं।
आईएईए की एटीएलएएस पहल सामुद्रिक उद्योग को नागरिक जहाजों को बिजली देने और समुद्र में ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने में मदद करेगी। यह पहल ऐसे समय में है जब परिचालक वैकल्पिक ईंधनों पर विचार कर रहे हैं और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना चाहते हैं।
आईएईए के अनुसार, एटीएलएएस की शुरुआत से इस पहल को उच्चस्तरीय राजनीतिक समर्थन मिलने और परमाणु तथा समुद्री क्षेत्रों के बीच सहभागिता बढ़ने के साथ मजबूत गति और व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
इस चर्चा से कानूनी एवं नियामकीय ढांचे, सुरक्षा, संरक्षा, निगरानी उपायों और दायित्व से जुड़े प्राथमिक कदमों को लेकर साझा समझ और सहमति बनने की उम्मीद है। साथ ही, इससे परमाणु और समुद्री क्षेत्रों के बीच सहयोग भी मजबूत होगा।
इस कार्यक्रम से परमाणु और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय की भी उम्मीद है। इसमें प्रमुख चुनौतियों, कमियों और उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां नियमों में सामंजस्य की आवश्यकता है। इन प्रयासों से एटीएलएएस के लिए स्पष्ट, व्यावहारिक और व्यापक रूप से समर्थित कार्ययोजना तैयार करने का आधार तैयार होगा।
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