न्यूयॉर्क, 25 अगस्त (भाषा) न्यूयॉर्क स्थित ‘टाइम्स स्क्वायर’ उस वक्त भारतीय साड़ियों के रंगों और विविध रूपों से सराबोर हो उठा प्रवासी भारतीय समुदाय की महिलाओं ने एक विशेष आयोजन में साड़ी की कालजयी खूबसूरती, समृद्ध विरासत और भारत की सांस्कृतिक विविधता को गर्व के साथ पेश किया।
‘टाइम्स स्क्वायर’ पर रविवार को ‘साड़ी गोज ग्लोबल’ कार्यक्रम का तीसरा संस्करण आयोजित किया गया। न्यूयॉर्क स्थित परोपकारी संस्था उमा ग्लोबल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं और युवतियों ने कढ़ाई, चित्रकारी और आकर्षक सजावट वाली साड़ियों में अपनी खूबसूरती बिखेरी। इनमें असम की पारंपरिक बुनाई, लखनऊ की चिकनकारी, बनारसी रेशम और शानदार कांजीवरम जैसी साड़ियां शामिल थीं। अलग-अलग रंगों और शिल्प की इन साड़ियों ने भारत के कोने-कोने में मौजूद इस नौ गज के परिधान की समृद्ध विविधता को खूबसूरती से सामने रखा।
खूबसूरत कढ़ाई, नायाब डिजाइनों और अलग-अलग तरह के कपड़ों से सजी रंग-बिरंगी साड़ियों में महिलाएं अपनी पारंपरिक पोशाक को गर्व के साथ प्रदर्शित करती नजर आईं। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे उन्होंने साथ मिलकर नृत्य किया, तस्वीरें खिंचवाईं और अपनी साड़ियों से जुड़ी कहानियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने अपनी संस्कृति और समृद्ध विरासत के रंग भी बिखेरे।
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल ने कार्यक्रम में पढ़े गए अपने संदेश में कहा कि यह आयोजन उन महिलाओं के सम्मान और उत्सव का अवसर है, जो “टाइम्स स्क्वायर में अपनी विरासत का गर्व के साथ जश्न मनाते हुए साड़ी पहनकर हमारे समुदायों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।”
होकुल ने उमा ग्लोबल की सराहना करते हुए उसे महिलाओं, अल्पसंख्यकों और कारोबारी पेशेवरों के लिए “बेहद महत्वपूर्ण सहारा” बताया।
उनके संदेश में कहा गया, “विविधता और समावेशन से जुड़े कार्यक्रमों, कारोबारी परामर्श और मार्गदर्शन के अवसरों के जरिए उमा लोगों और संस्थानों को अपने लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने में मदद करती है। जब हम हर व्यक्ति और हर पृष्ठभूमि के पेशेवरों को आगे बढ़ने और सफल होने का अवसर देते हैं, तो हम ऐसा भविष्य बनाने में मदद करते हैं, जो हम सभी के लिए बेहतर हो।”
इस मौके पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में वाणिज्य दूत (व्यापार) राजलक्ष्मी अप्पासाहेब कदम ने अपने संदेश में कहा कि साड़ी भारतीय कला, परंपरा, संस्कृति और मेहनती बुनकरों की जीवंत विरासत है।
कदम ने कहा, “साड़ी हमारी ऐसी पेशाक है जिसे सिलाई की जरूरत नहीं होती और यह हमारी विरासत का सम्मान करने के पारंपरिक और सतत हथकरघा परंपराओं के जरिए स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाती है। यह समृद्ध होती आधुनिक फैशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। साथ ही, यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हमारे पूर्वजों की समृद्ध कहानियों को भी संजोए रखती है।”
भाषा तान्या खारी
खारी