इंडोनेशिय पांच ओरंगुटान को वापस लाने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा
इंडोनेशिय पांच ओरंगुटान को वापस लाने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा
जकार्ता, 12 सितंबर (भाषा) इंडोनेशिया ओडिशा के एक जंगल में पाए गए ओरंगुटान के पांच बच्चों को स्वदेश वापस भेजने की प्रक्रिया तेज करने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। स्थानीय मीडिया की एक खबर के अनुसार, आशंका है कि ये वन्यजीवों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के शिकार हैं।
छह महीने से एक साल की उम्र के इन प्राणियों में तीन नर और दो मादा हैं। इन्हें आठ सितंबर को ओडिशा के बालासोर जिले के बिचित्रपुर जंगल से बचाया गया था।
ओरंगुटान एक तरह के ‘वनमानुष’ (एप) हैं जो इंसानों के काफी करीबी होते हैं। सरकारी समाचार एजेंसी ‘अंतारा’ की खबर के अनुसार, इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि इन ओरंगुटान के मिलने के बाद से ही उनकी सरकार भारत के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है।
मंत्रालय के जनसंपर्क और विदेशी सहयोग ब्यूरो के प्रमुख रिसतियांतो प्रिबादी ने एक बयान में कहा, ‘‘इनकी शारीरिक विशेषताओं के प्रारंभिक अवलोकन के आधार पर पांचों जानवरों के सुमात्रा ओरंगुटान होने की आशंका है।’’
उन्होंने कहा कि पहचान अभी प्रारंभिक चरण में है और वैज्ञानिक अधिकारी इनकी प्रजाति और आनुवंशिक उत्पत्ति की पुष्टि के लिए डीएनए जांच करेंगे।
इन ओरंगुटान को बेहतर देखभाल के लिए अब भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान में स्थानांतरित कर दिया गया है।
प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) के अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा सरकार ने ओरंगुटान को तनाव मुक्त करने और उनके आराम के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
उन्होंने कहा कि इन ओरंगुटान में कई तरह की भावनाएं देखने को मिलीं, जिनमें उनका मौज-मस्ती वाला व्यवहार करना और थोड़े समय के लिए मनोदशा में बदलाव के साथ घबराहट में एक-दूसरे को कसकर पकड़ना शामिल है।
उन्होंने बताया कि पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, इन जानवरों को मुलायम खिलौनों से खेलने और संगीत सुनने की सुविधा भी दी जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि वे धीरे-धीरे तनाव मुक्त हो रहे हैं।
ओरंगुटान मूल रूप से सुमात्रा और बोर्नियो द्वीपों में पाए जाते हैं, इसलिए भारत में उनकी मौजूदगी से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह के जरिए तस्करी कर लाया गया होगा।
भाषा संतोष माधव
माधव

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