भारत-रूस रिश्तों में दखल वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदायक, मोदी दबाव के आगे नहीं झुकते : पुतिन
भारत-रूस रिश्तों में दखल वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदायक, मोदी दबाव के आगे नहीं झुकते : पुतिन
(तस्वीरों के साथ)
(विजय जोशी)
सेंट पीटर्सबर्ग (रूस), पांच जून (भाषा) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के साथ मॉस्को के समय की कसौटी पर खरे उतरे संबंधों की सराहना करते हुए आगाह किया कि भारत-रूस संबंधों को कमजोर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पश्चिमी देशों का दबाव वैश्विक स्थिरता के लिए नुकसानदायक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति ‘‘अचानक नहीं हुई है’’, बल्कि यह मोदी के नेतृत्व में किए गए कठिन परिश्रम का परिणाम है।
‘पीटीआई’ सहित दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बृहस्पतिवार रात को हुई बातचीत में पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रूस भारत के साथ अपने समग्र सहयोग को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 60 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने की परिकल्पना कर रहा है।
पुतिन ने स्वच्छ ऊर्जा, औषधि और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र को व्यापार व निवेश संबंधों की निरंतर प्रगति को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया।
पुतिन ने ‘पीटीआई’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रधान संपादक विजय जोशी के एक सवाल पर कहा, ‘‘भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसने सबसे अधिक आर्थिक वृद्धि दर दिखाई है। यह अचानक नहीं हुआ है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की कड़ी मेहनत का परिणाम है।’’
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। हमारे पास अधिक सक्रिय रूप से काम करने और इससे भी अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी आवश्यक आधार मौजूद हैं। हम केवल ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में भी नए अवसर और मंच विकसित होंगे।’’
भारत पर रूस के साथ अपने संबंध सीमित करने का दबाव बनाने को लेकर पश्चिमी देशों की तीखी आलोचना करते हुए पुतिन ने कहा कि मॉस्को को इसका कोई नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रणनीतियां अंततः उलटा असर डालेंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘सभी को समझ आ गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक है। यह दबाव कहीं से भी आए, इससे फर्क नहीं पड़ता।’’
उन्होंने भारत को रूस का ‘भरोसेमेंद’ रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा, ‘‘हमें इसका कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखा।’’
रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ पश्चिमी देशों में भारत-रूस संबंधों को लेकर असहजता बढ़ी है। अमेरिका लगातार भारत से रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने का आग्रह करता रहा है।
पुतिन ने जोर देकर कहा कि भारत आगे भी अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के राजनयिक संबंध रूस के साथ उसके रणनीतिक रिश्तों में कोई बाधा नहीं डालते।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और अमेरिका के बढ़ते संबंधों से रूस के लिए किसी तरह की असहजता की स्थिति पैदा होती है, पुतिन ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह कोई समस्या है। हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है। वह एक महान देश है, एक बड़ा लोकतंत्र है, सबसे बड़ा लोकतंत्र है, स्वाभाविक है कि वह अपने हितों के अनुरूप उन देशों के साथ अपनी अर्थव्यवस्था का विकास करेगा जिनके साथ उसे ऐसा करना जरूरी लगता है।’’
पुतिन ने कहा कि रूस, भारत को एक ‘‘भरोसेमंद साझेदार’’ मानता है और नयी दिल्ली के किसी अन्य देश के साथ संबंधों का उसे कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखता।
रूसी राष्ट्रपति ने पिछले वर्ष दिसंबर में भारत की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी वार्ता के बाद दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की थी। इनमें मजबूत आर्थिक साझेदारी विकसित करने और भारत की व्यापार घाटे संबंधी चिंताओं के समाधान के लिए पांच वर्षीय रूपरेखा भी शामिल थी।
मोदी और पुतिन के बीच हुई शिखर वार्ता का मुख्य केंद्र पारंपरिक क्षेत्रों जैसे तेल और रक्षा से आगे बढ़कर आर्थिक सहयोग का विस्तार करना था। दोनों पक्षों ने आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई।
शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं ने आठ दशक से अधिक पुरानी भारत-रूस मित्रता को नयी गति देने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत-रूस की मित्रता ‘‘ध्रुव तारे’’ की तरह अटल और स्थिर बनी हुई है।
पुतिन सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक बार फिर भारत आने वाले हैं।
यूक्रेन संघर्ष से जुड़े एक सवाल पर पुतिन ने कहा कि वह इस विवाद का समाधान चाहते हैं और अब मुख्य चुनौती कीव को इसके लिए मनाना है।
उन्होंने यह विचार भी खारिज कर दिया कि यूरोपीय संघ के देश यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोपीय संघ हथियारों की आपूर्ति करने के बजाय यदि कीव को समझौते के लिए राजी करे तो वह संघर्ष के समाधान में अधिक मददगार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट एक ‘‘स्थानीय’’ मुद्दा है, जबकि ईरान का मुद्दा वैश्विक है।
पुतिन ने कहा, ‘‘रूस उन पर कैसे भरोसा कर सकता है जो वर्षो से रूस को रणनीतिक रूप से पराजित करने की बात करते आ रहे हैं?’’
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में मददगार किसी भी निर्णय का रूस समर्थन करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वैधता पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनका राष्ट्रपति पद का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
पुतिन ने कहा, ‘‘वे चुनाव कराएंगे या नहीं? हमें ये सवाल पूछने चाहिए।’’
भाषा गोला वैभव
वैभव

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