अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के समझौते के तहत इजराइल को लेबनान से हटना होगा : ईरान

अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के समझौते के तहत इजराइल को लेबनान से हटना होगा : ईरान

अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के समझौते के तहत इजराइल को लेबनान से हटना होगा : ईरान
Modified Date: June 16, 2026 / 05:59 pm IST
Published Date: June 16, 2026 5:59 pm IST

दुबई, 16 जून (एपी) ईरान के विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने वाले समझौते के तहत इजराइल को भी लेबनान से हटना होगा। वहीं, इजराइल द्वारा लेबनान में अपनी सेना बनाए रखने पर जोर देने के बीच, अप्रकाशित समझौते को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं और इसकी शर्तों पर असहमति से संघर्ष के जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दक्षिणी लेबनान पर इजराइल का कब्जा बने रहना, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का उल्लंघन होगा।

तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत के दौरान अराघची ने कहा, ‘‘लेबनान में युद्ध का खत्म होना, पूरे युद्ध के खत्म होने का एक अहम हिस्सा है। जब तक इजराइली सेना उन इलाकों से पीछे नहीं हटती जिन पर उसने इस युद्ध के दौरान कब्जा किया था, युद्ध पूरी तरह से खत्म नहीं होगा।’’

यह बातचीत ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित की गई।

अराघची ने कहा कि लेबनान पर इजराइल के और हमलों को ‘‘हम समझौता ज्ञापन का उल्लंघन मानेंगे।’’

हालांकि, अमेरिका ने यह नहीं बताया है कि लेबनान अंतिम समझौते का हिस्सा था या नहीं। लेकिन अराघची का बयान उन बातों से मेल नहीं खाता जो इजराइली अधिकारियों ने उस समझौते के बारे में कही हैं, जिसका मकसद 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों से शुरू हुए युद्ध को खत्म करना है।

इजराइल इस समझौते का हिस्सा नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को इसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला बताया और कहा कि इजराइल की अपनी प्राथमिकताएं हैं और वह लेबनान में ‘‘जरूरत पड़ने तक’’ बफर जोन में बना रहेगा।

यह अस्पष्टता पिछली बातचीत के दौरान हुई घटनाओं, जिसमें अप्रैल में हुई अस्थायी युद्ध-विराम संधि भी शामिल है, जैसी है। उस समझौते से न तो व्यापक शांति का रास्ता खुला और न ही अमेरिका और ईरान द्वारा अलग-अलग रूपरेखाओं की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

इस अंतर से यह बात साफ हो गई कि शुक्रवार को जिनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर से पहले समझौते का कितना हिस्सा अब भी अनसुलझा रह गया है।

इस समझौते का मकसद एक महीने से जारी उस जंग में सार्थक युद्धविराम करना है, जिसमें ईरान के शीर्ष नेताओं समेत पूरे पश्चिम एशिया में हजारों लोग मारे गए हैं और खाड़ी क्षेत्र के बाहर भी ईंधन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, इस अप्रकाशित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘‘तुरंत’’ खोलने और नाकाबंदी हटाने का प्रावधान है।

पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, मुख्य रूप से पाकिस्तान की मध्यस्थता से होने वाले इस समझौते की शुरुआत ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को खोलने और अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी को एक साथ हटाने से होगी। इस अंतरिम समझौते को कराने में मदद करने वाले पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद वाशिंगटन और तेहरान, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की संभावना पर 60 दिनों की बातचीत शुरू करेंगे।

अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि अगर तेहरान कुछ तय शर्तें पूरी करता है, तो इसमें ईरान के जब्त किये गए धन को जारी करने, प्रतिबंधों में ढील देने और ईरान के पुनर्निर्माण में मदद के लिए 300 अरब अमेरिकी डॉलर की निधि देने की संभावना भी शामिल है।

मंगलवार को आया अराघची का बयान, अंतरिम समझौते की जानकारी रखने वाले दो क्षेत्रीय अधिकारियों की बातों से मेल खाती नजर आती है। बंद कमरे में हुई बातचीत के बारे में अधिकारियों ने बताया कि इसके तहत इजराइल को लेबनान में कब्जे वाली लगभग सारी जमीन छोड़नी होगी, सिवाय सीमा के पास मौजूद कुछ पहाड़ी इलाकों के, जिन पर पहले कब्जा किया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के आखिरी दिनों में ईरान ने जोर दिया कि समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाए। समय-सीमा के बारे में अधिकारियों ने बताया कि ईरान की जब्त संपत्ति को मुक्त करना इस बात पर निर्भर करेगा कि तेहरान समझौते को लागू करता है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी के अरब देशों ने ईरान की अर्थव्यवस्था में अरबों अमेरिकी डॉलर लगाने का वादा किया है।

लेबनान के अलावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक और विवाद की गुंजाइश है। अंतरिम समझौते के तहत तेहरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर बातचीत के लिए 60 दिन की समय-सीमा शुरू हो गई है।

अधिकारियों ने बताया कि ईरान अपने इस भंडार को ‘‘कम करने या हटाने’’ के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हो गया है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि तेहरान इसके लिए सहमत होगा या नहीं, खासकर इसलिए क्योंकि वहां के कट्टरपंथी इसे सौंपे जाने के खिलाफ हैं।

एपी सुभाष पवनेश

पवनेश


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