Chhattisgarh ka Anokha School Kaha Hai: छात्र तो नहीं…कुत्ता रोज समय से पहुंच जाता है स्कूल, छत्तीसगढ़ का अनोखा सरकारी स्कूल जहां टीचर तो हैं, लेकिन स्टूडेंट एक भी नहीं

Ads

Chhattisgarh ka Anokha School Kaha Hai: छात्र तो नहीं...कुत्ता रोज समय से पहुंच जाता है स्कूल, छत्तीसगढ़ का अनोखा स्कूल जहां टीचर तो हैं, लेकिन स्टूडेंट एक भी नहीं

Chhattisgarh ka Anokha School Kaha Hai: छात्र तो नहीं...कुत्ता रोज समय से पहुंच जाता है स्कूल, छत्तीसगढ़ का अनोखा सरकारी स्कूल जहां टीचर तो हैं, लेकिन स्टूडेंट एक भी नहीं / Image: IBC24 Original

HIGHLIGHTS
  • स्कूल में 2026-27 सत्र में एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ
  • स्कूल में 2 शिक्षक, 2 रसोइया और 1 सफाई कर्मी पदस्थ
  • बीईओ ने शिक्षकों के समायोजन और स्कूल को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेज दिया

This browser does not support the video element.

जशपुर: Chhattisgarh ka Anokha School Kaha Hai पत्थलगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जामजूनवानी के आश्रित ग्राम नरवाटिकरा का शासकीय प्राथमिक स्कूल इन दिनों सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक अनोखी तस्वीर पेश कर रहा है। शिक्षा सत्र 2026-27 में इस स्कूल में एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है, लेकिन विभागीय निर्देशों के तहत स्कूल रोज खुल रहा है और शिक्षक नियमित रूप से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। स्कूल परिसर में सिर्फ एक पालतू कुत्ता है जो रोज स्कूल कैम्पस में नजर आता है जो मानो इस स्कूल का नियमित सदस्य बन गया हो।

स्कूल में एक भी बच्चे ने नहीं लिया एडमिशन

Chhattisgarh ka Anokha School Kaha Hai मिली जानकारी के अनुसार नरवाटिकरा प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक राजाराम एक्का और सहायक शिक्षक फिलमोन लकड़ा पदस्थ हैं। मीडिया के पहुंचने पर स्कूल में प्रधान पाठक स्कूल में मौजूद मिले, जबकि सहायक शिक्षक बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित थे। जानकारी के अनुसार इस स्कूल में दो रसोइया और एक सफाई कर्मी भी पदस्थ हैं। छात्र नहीं होने के कारण रसोइए स्कूल नहीं आते, जबकि सफाई कर्मी प्रतिदिन सुबह सफाई करने के बाद वापस लौट जाते हैं।

घर बैठे सैलरी लेता है रसोइया

स्कूल के कमरों में रखी पाठ्यपुस्तकें, खेल सामग्री और अन्य शैक्षणिक संसाधन उपयोग के अभाव में धूल खा रहे हैं। पूरा परिसर वीरान दिखाई देता है। आपको बता दें कि इस स्कूल में वर्ष 2022 में 15, 2023 में 12, 2024 में 12 और 2025 में 07 छात्र अध्ययन करते थे लेकिन इस वर्ष 1 भी छात्र ने स्कूल में दाखिला नहीं लिया है। अभिभावकों के द्वारा अपने बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला कराया जा रहा है जिसके कारण शासकीय स्कूलों में छात्रों की लगातार कमी देखने को मिल रही है। संकुल समन्वयक के अनुसार शून्य नामांकन की रिपोर्ट पहले ही बीईओ और बीआरसीसी कार्यालय को भेजी जा चुकी है। विभाग ने ऐसे सभी स्कूलों की सूची तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। वहीं प्रधान पाठक का कहना है कि बस्ती में स्कूली आयु के बच्चे नहीं हैं और जो कुछ बच्चे हैं, उनके अभिभावक उन्हें निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को सरकारी स्कूल में लाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली।

छात्र नहीं फिर भी पदस्थ हैं शिक्षक

पत्थलगांव के बीईओ वेदानंद आर्य का कहना है कि नरवाटिकरा प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षकों के समायोजन और विद्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव कलेक्टर को भेज दिया गया है। अंतिम निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया जाएगा। एक तरफ जिले के कई सरकारी स्कूल शिक्षक की कमी से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ नरवाटिकरा प्राथमिक शाला में बिना एक भी छात्र के पूरा स्टाफ पदस्थ है। अब सवाल यह है कि आखिर इस स्कूल का भविष्य क्या होगा, शिक्षकों का समायोजन कब होगा और करोड़ों की सरकारी व्यवस्था का बेहतर उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। फिलहाल इस पूरे मामले में सबकी नजर जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी हुई है।

ये भी पढ़ें

किस स्कूल में एक भी छात्र का एडमिशन नहीं हुआ है?

पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम नरवाटिकरा स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल में सत्र 2026-27 में एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है।

स्कूल में छात्र नहीं होने के बावजूद क्या शिक्षक ड्यूटी पर आते हैं?

हां, विभागीय निर्देशों के अनुसार प्रधान पाठक नियमित रूप से स्कूल आते हैं। स्कूल रोज खुलता है और अन्य कर्मचारी भी नियमानुसार अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

इस स्कूल में पहले कितने छात्र पढ़ते थे?

वर्ष 2022 में 15, 2023 में 12, 2024 में 12 और 2025 में 7 छात्र थे, लेकिन 2026-27 में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया।

स्कूल में बच्चों की संख्या शून्य होने की वजह क्या बताई गई है?

अधिकारियों के अनुसार गांव में स्कूली आयु के बच्चों की संख्या कम है और अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करा रहे हैं।

अब इस सरकारी स्कूल का क्या होगा?

बीईओ ने शिक्षकों के समायोजन और विद्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव जिला कलेक्टर को भेज दिया है। अंतिम निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया जाएगा।