जयशंकर ने पोलिश शरणार्थियों को आश्रय देने वाले भारतीय शासकों को दी श्रद्धांजलि

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जयशंकर ने पोलिश शरणार्थियों को आश्रय देने वाले भारतीय शासकों को दी श्रद्धांजलि

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  • Publish Date - September 5, 2026 / 08:24 PM IST,
    Updated On - September 5, 2026 / 08:24 PM IST

(फोटो के साथ)

वारसॉ, पांच सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को वारसॉ में दो स्मारकों का दौरा किया। ये स्मारक दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों को आश्रय देने में भारत की मानवीय भूमिका की याद दिलाते हैं और उस कम ज्ञात अध्याय को उजागर करते हैं, जिसने दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को आकार दिया है।

जयशंकर ने शुक्रवार को पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ व्यापक बातचीत के एक दिन बाद स्मारकों का दौरा किया। इस बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला की मज़बूती जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

जयशंकर तीन से पांच सितंबर तक दो देशों यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा पर हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार को कीव का दौरा किया, जहां उन्होंने यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की।

नवानगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा के स्मारक पर, जयशंकर ने उन शब्दों को याद किया जिनसे भारतीय शासक ने युद्ध की तबाही से बचकर आए पोलिश बच्चों का स्वागत किया था: ‘‘मैं बापू हूं, नवानगर के सभी लोगों का पिता, जिसमें आप सब भी शामिल हैं।’’

जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जडेजा को ‘‘दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 1,000 पोलिश बच्चों की देखभाल करने के लिए प्यार से याद किया जाता है’’ और ‘‘उनकी आत्मीयता और करुणा भारत और पोलैंड के बीच एक स्थायी पुल बनी हुई है।’’

जडेजा तत्कालीन नवानगर रियासत के शासक थे, जो अब गुजरात के जामनगर का हिस्सा है। उन्होंने बालाचड़ी में बनाए गए एक शिविर में इन बच्चों को आश्रय और देखभाल उपलब्ध कराई थी। बच्चों को वहां रहने की सुविधा, भोजन, शिक्षा और चिकित्सा सहायता दी गई। बाद में ये बच्चे उन्हें प्यार से ‘‘बापू’’ के रूप में याद करने लगे।

बाद में, विदेश मंत्री ने वारसॉ स्थित कोल्हापुर स्मारक पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक पोलैंड के लिए भारत की ओर से युद्धकाल में दी गई सहायता के एक अन्य अध्याय की याद दिलाता है।

यह स्मारक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पास वलीवाडे में महिलाओं और बच्चों समेत करीब 5,000 पोलिश शरणार्थियों को कोल्हापुर रियासत की ओर से दिए गए आश्रय की याद दिलाता है।

जयशंकर ने पोलिश शरणार्थियों को दिए गए आश्रय को याद करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह उदारता की भावना आज भी पोलैंड के लोगों की स्मृतियों में ताजा है।’’

ये दोनों स्मारक एक व्यापक ऐतिहासिक जुड़ाव का हिस्सा हैं, जिसे हाल के वर्षों में भारत-पोलैंड संबंधों में फिर से विशेष महत्व मिला है।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप