अमेरिका-द.कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की किम जोंग उन की बहन ने की आलोचना

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अमेरिका-द.कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की किम जोंग उन की बहन ने की आलोचना

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 10:23 AM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 10:23 AM IST

सियोल, 10 मार्च (एपी) उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास जारी रखने की आलोचना करते हुए कहा है कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा के लिए संवेदनशील समय में उठाया गया है और उत्तर कोरिया की सुरक्षा को किसी भी तरह की चुनौती “भयानक परिणाम” ला सकती है।

किम यो जोंग का यह बयान मंगलवार को उस समय आया जब सहयोगी देशों ने एक दिन पहले हजारों सैनिकों की भागीदारी वाले 11 दिन के ‘फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत की थी। इसी दौरान अमेरिका इजराइल के साथ पश्चिम एशिया में ईरान के साथ युद्ध भी कर रहा है।

ईरान का सीधे उल्लेख किए बिना किम ने कहा कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया का सैन्य अभ्यास ऐसे समय क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करता है जब वैश्विक सुरक्षा ढांचा “तेजी से ढह रहा है और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में युद्ध हो रहे हैं।”

‘फ्रीडम शील्ड’ अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा किए जाने वाले दो वार्षिक कमांड-पोस्ट अभ्यासों में से एक है। यह मुख्य रूप से कंप्यूटर आधारित अभ्यास है, जिसका उद्देश्य बदलते युद्ध परिदृश्यों और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सहयोगी देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता का परीक्षण करना है। इसके साथ ‘वॉरियर शील्ड’ नामक फील्ड-ट्रेनिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।

देश के विस्तारित परमाणु कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए किम यो जोंग ने कहा कि उत्तर कोरिया बाहरी खतरों के खिलाफ अपनी “शक्ति” को और मजबूत करता रहेगा तथा दुश्मनों को बार-बार अपनी युद्ध निरोधक क्षमता और उसकी घातकता का अहसास कराता रहेगा।

उत्तर कोरिया लंबे समय से इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों को आक्रमण की तैयारी बताता रहा है और अक्सर इन्हें अपने सैन्य प्रदर्शन या हथियार परीक्षण बढ़ाने के औचित्य के रूप में इस्तेमाल करता है। हालांकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि ये अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति के हैं।

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को “फर्जी शांति” के बहाने किया गया “अवैध आक्रामक कृत्य” बताया था।

उत्तर कोरिया और ईरान उन कुछ देशों में से हैं जिन्होंने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का समर्थन किया था। दोनों देशों पर रूस को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप भी लगाए गए हैं।

(एपी) मनीषा

मनीषा