Kuwait Cancels Muslim Womens Citizenship: कुवैत: दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार मुस्लिम देश कुवैत की सरकार ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। यहाँ की सरकार ने करीब 25 हजार से ज्यादा महिलाओं और दूसरे लोगों की नागरिकता रद्द कर दी है। इनमें ज्यादातर महिलाएं वो है जिन्होंने कुवैत के पुरुषों से विवाह कर देश की नागरिकता हासिल की थी।
इतना ही नहीं बल्कि जिनकी नागरिकता रद्द की गई है उनके बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए गए है। सरकार ने ऐसे लोगों की सरकारी सेवाओं पर भी रोक लगा दी है। सरकार के इस फैसले के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।
Kuwait Cancels Muslim Womens Citizenship: कुवैत सरकार के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के अगस्त से अब तक 37 हजार लोगों का सिटिजनशिप छीना जा चुका है। इनमें करीब 26 हजार महिलाओं का नाम शामिल हैं। हालांकि मीडिया का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। गौर करने वाली बात यह भी है कि, कुवैत में पहले से ही हजारों लोग ऐसे हैं जिनके पास सिटिजनशिप नहीं है। 1961 में ब्रिटिश सुरक्षा से आजादी के बाद भी करीब 1 लाख लोगों को नागरिकता नहीं दी गई थी। नागरिकता न होने पर लोगों को आम दिनचर्या के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इनके सरकारी कामकाज, बैंक से जुड़े काम पर खासा असर पड़ा है।
❓1. कुवैत सरकार ने किन लोगों की नागरिकता रद्द की है और क्यों?
कुवैत सरकार ने लगभग 25,000 से अधिक महिलाओं और अन्य लोगों की नागरिकता रद्द की है। इनमें अधिकांश महिलाएँ वे हैं जिन्होंने कुवैती पुरुषों से विवाह कर देश की नागरिकता प्राप्त की थी। सरकार का कहना है कि यह कदम नागरिकता प्रणाली में सुधार और गलत तरीके से नागरिकता लेने वालों की पहचान के लिए उठाया गया है। हालाँकि, इसे लेकर काफी विवाद और असंतोष भी देखने को मिला है।
❓2. नागरिकता रद्द होने के बाद प्रभावित लोगों पर क्या असर पड़ा है?
जिनकी नागरिकता रद्द की गई है, उनके: बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं सरकारी सेवाओं तक पहुंच रोक दी गई है सामान्य जीवन के कार्यों में दिक्कत आ रही है, जैसे कि स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, और यात्रा यह फैसला उनके मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।
❓3. क्या इससे पहले भी कुवैत में नागरिकता से जुड़ा ऐसा कोई मामला सामने आया है?
हाँ, कुवैत में 1961 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी लगभग 1 लाख से अधिक लोगों को कभी नागरिकता नहीं दी गई थी। ये लोग आज भी "बिदून" (stateless) के रूप में जाने जाते हैं। इनकी कोई आधिकारिक पहचान नहीं होती, जिससे वे न तो सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं और न ही कानूनी अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।