Mayor Marries Crocodile: दूल्हा बना शहर का मेयर, मगरमच्छ से रचाई शादी, जानें आखिर क्यों करना पड़ा ये अजीबोगरीब काम

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Mayor Marries Crocodile: दूल्हा बना शहर का मेयर, मगरमच्छ से रचाई शादी, जानें आखिर क्यों करना पड़ा ये अजीबोगरीब काम

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  • Publish Date - July 7, 2026 / 01:51 PM IST,
    Updated On - July 7, 2026 / 01:52 PM IST

Mayor Marries Crocodile | Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • मेयर ने मगरमच्छ से रचाई शादी
  • समुद्र और नदी की शक्ति का प्रतीक
  • मछुआरों के लिए सौभाग्य लाने की मान्यता

मेक्सिको: Crocodile Bride वैसे तो शादी दो इंसानों के बीच होती है। लेकिन दुनिया में कई ऐसी परंपराएं भी हैं जो लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसा एक ही मामला मेक्सिको के ओआक्साका प्रांत का एक छोटा सा शहर सैन पेड्रो हुएमेलुला से सामने आया है, यहां मेयर विक्टर एगुइलर (Mayor Marries Crocodile) एक ऐसी दुल्हन से शादी की है जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह गया।

Shocking Marriage  जानकारी के अनुसार, ये दुल्हन कोई आम इंसान नहीं है, बल्कि एक मादा मगरमच्छ है। जिसे मेयर ने दुल्हन की तरह सजाकर उससे शादी रचाई है। बकायदा मगरमच्छ को दुल्हन (Crocodile Bride) की तरह सजाया गया था। उन्हें सफेद गाउन पहनाया गया था। मेयर ने मगरमच्छ से पूरी रिति रिवाज के साथ शादी रचाई है। जिसके बाद उन्हें किस भी किया और गले से भी लगाया। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से मगरमच्छ के जबड़ों को मजबूती से बांध दिया गया था, ताकि किसी भी अनहोनी की गुंजाइश न रहे।

क्यों निभाते हैं ये रस्म?

अब आप ये सोच रहे होंगे कि भला कोई ऐसा कैसे कर सकता है। दरअसल, यहां सदियों से एक पुरानी आदिवासी परंपरा चला आ रहा है। स्थानीय मछुआरों का मानना है कि मगरमच्छ को नदी और समुद्र की देवी का दर्जा प्राप्त है। मेयर का इस जीव से शादी करना दरअसल, प्रकृति के साथ एक समझौता करने जैसा है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान को करने से समुद्र शांत रहता है और मछुआरों को मछली पकड़ने में बंपर सफलता मिलती है। यह रस्म पूरे समुदाय के लिए समृद्धि लाने का जरिया मानी जाती है, जिसे मेयर का फर्ज माना गया है।

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मेयर ने मगरमच्छ से शादी क्यों की?

यह एक पुरानी आदिवासी परंपरा है, जिससे समुद्र शांत रहता है और मछुआरों को सफलता मिलती है।

मगरमच्छ को कैसे सजाया गया था?

सफेद गाउन पहनाकर दुल्हन की तरह सजाया गया।

क्या यह परंपरा हर साल होती है?

हाँ, यह सदियों से चली आ रही परंपरा है और समुदाय की समृद्धि के लिए निभाई जाती है।