कुवैत पर हुए मिसाइल हमले, जोखिम में पड़ सकता है युद्धविराम

कुवैत पर हुए मिसाइल हमले, जोखिम में पड़ सकता है युद्धविराम

कुवैत पर हुए मिसाइल हमले, जोखिम में पड़ सकता है युद्धविराम
Modified Date: May 28, 2026 / 07:28 pm IST
Published Date: May 28, 2026 7:28 pm IST

दुबई, 28 मई (एपी) युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए कुवैत पर किये गये ताजा मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी सेना ने बृहस्पतिवार को ईरान की आलोचना की। इस हमले ने युद्ध को खत्म करने के लिए जारी वार्ता को जोखिम में डाल दिया है।

अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा कि कुवैत ने बुधवार देर रात ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों को मार गिराया, और फारस की खाड़ी में अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों में से एक पर ईरानी हमले को ‘‘युद्धविराम का घोर उल्लंघन’’ बताया।

कुवैत ने पूर्व में, अपने क्षेत्र पर हमले होने की जानकारी दी थी। वहीं, ईरान ने कहा कि उसने खाड़ी क्षेत्र में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर इस सप्ताह की शुरुआत गोलाबारी कर जवाबी कार्रवाई की है।

अमेरिका और ईरान ने पूरे सप्ताह एक-दूसरे पर हमले किए हैं, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि उनका प्रशासन युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के साथ बातचीत में प्रगति कर रहा है।

अमेरिका ने सोमवार को कहा था कि उसने दक्षिणी ईरान में मिसाइल स्थलों और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं पर ‘‘रक्षात्मक’’ हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों ने बुधवार देर रात वाशिंगटन में कहा कि सेना ने ईरान पर और हमले किए, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास खतरा पैदा करने वाले चार ड्रोन को मार गिराया गया और बंदर अब्बास में एक ईरानी जमीनी नियंत्रण स्टेशन को निशाना बनाया, जहां से पांचवां ड्रोन रवाना होने वाला था।

ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के माध्यम से बंदर अब्बास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास हुए हमले की पुष्टि की और कहा कि उसने हमले को अंजाम देने वाले सैन्य ठिकाने पर जवाबी हमला किया है, हालांकि उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि संदर्भित हमले का लक्ष्य कुवैत था या नहीं।

कुवैत की सेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि किन लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था।

इस बीच, ट्रंप एक ऐसे समझौते की तलाश में हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सके। इस जलमार्ग से विश्व के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन होता है। वह ईरान पर उच्च संवर्द्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए भी दबाव डाल रहे हैं, जबकि इस्लामिक गणराज्य आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और अपनी चरमराई हुई अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए जब्त की गई संपत्तियों को मुक्त करने की मांग कर रहा है।

एपी सुभाष सुरेश

सुरेश

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