होर्मुज सुरक्षा मिशन में शामिल होने का मेरा प्रस्ताव नाटो, अधिकतर सहयोगियों ने खारिज किया: ट्रंप

होर्मुज सुरक्षा मिशन में शामिल होने का मेरा प्रस्ताव नाटो, अधिकतर सहयोगियों ने खारिज किया: ट्रंप

होर्मुज सुरक्षा मिशन में शामिल होने का मेरा प्रस्ताव नाटो, अधिकतर सहयोगियों ने खारिज किया: ट्रंप
Modified Date: March 18, 2026 / 12:01 am IST
Published Date: March 18, 2026 12:01 am IST

(सागर कुलकर्णी)

वाशिंगटन, 17 मार्च (भाषा) ईरान के साथ युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और अधिकतर अन्य सहयोगी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद करने के उनके आह्वान को खारिज कर दिया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता “ध्वस्त” हो चुकी है और उन्हें अब नाटो देशों या किसी अन्य से सहायता की आवश्यकता नहीं है।

पिछले सप्ताह ट्रंप ने यूरोपीय देशों और अन्य देशों से मदद का आह्वान किया था ताकि अहम समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने पोस्ट में कहा, “हमारे अधिकतर नाटो सहयोगियों ने अमेरिका को सूचित किया है कि वे पश्चिम एशिया में ईरान के आतंकवादी शासन के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि लगभग हर देश इस बात से सहमत है कि ईरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”

ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ा दी है और विश्व अर्थव्यवस्था को अस्थिर किया है।

ट्रंप ने कहा, “मुझे उनके इस फैसले पर हैरानी नहीं है, क्योंकि मैं हमेशा नाटो को एकतरफा व्यवस्था मानता रहा हूं। हम हर साल इन देशों की सुरक्षा पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करते हैं। हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन जरूरत के समय वे हमारे लिए कुछ नहीं करते।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी मदद के उनके आह्वान को ठुकरा दिया है।

ट्रंप ने कहा, “खुशकिस्मती से हमने ईरान की सेना को पूरी तरह कमजोर कर दिया है। उनकी नौसेना खत्म हो गई है, वायुसेना खत्म हो गई है, उनकी विमान रोधी और रडार व्यवस्था भी खत्म हो चुकी है। और शायद सबसे अहम बात यह है कि लगभग हर स्तर के उनके नेता अब नहीं रहे, इसलिए वे फिर कभी हमें, हमारे पश्चिम एशिया के सहयोगियों या दुनिया को धमकी नहीं दे पाएंगे।”

उन्होंने कहा कि हाल की सैन्य सफलताओं को देखते हुए अमेरिका को अब नाटो देशों की मदद की न आवश्यकता है और न ही इच्छा, और वह पहले भी ऐसे समर्थन पर निर्भर नहीं रहा है।

ट्रंप ने कहा, “दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति होने के नाते मैं कहता हूं कि हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है।”

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था तथा जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कुछ खाड़ी देशों पर हमले किए और अमेरिका व इजराइल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया।

हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान के नजरिए से जलडमरूमध्य “खुला” है और यह केवल ईरान के दुश्मनों तथा उनके सहयोगियों के लिए बंद है।

इस बीच, युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित निकलकर भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ भारत पहुंच गया। सोमवार को पहला जहाज ‘शिवालिक’ गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था।

फिलहाल 22 भारतीय पोत जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और दो पूर्वी हिस्से में मौजूद हैं।

अधिकारियों ने कहा कि शेष जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारी क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं।

भाषा खारी नेत्रपाल

नेत्रपाल


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