नासा की नयी अंतरिक्ष दूरबीन 16 लाख किलोमीटर लंबे सफर पर रवाना, ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाएगी

नासा की नयी अंतरिक्ष दूरबीन 16 लाख किलोमीटर लंबे सफर पर रवाना, ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाएगी

नासा की नयी अंतरिक्ष दूरबीन 16 लाख किलोमीटर लंबे सफर पर रवाना, ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाएगी
Modified Date: August 30, 2026 / 08:48 pm IST
Published Date: August 30, 2026 8:48 pm IST

केप कैनावेरल (अमेरिका), 30 अगस्त (एपी) नासा की सबसे नयी और अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन रविवार को अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गई। इसका उद्देश्य दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, रहस्यमयी ‘डार्क एनर्जी’ का अध्ययन करना और ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है।

‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (नासा) में विज्ञान मिशन निदेशक निक्की फॉक्स ने कहा, ‘‘यह दूरबीन हजारों सुपरनोवा, दसियों हजार ग्रहों, अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों की खोज करने में सक्षम होगी। अपने विशाल दृश्य क्षेत्र के कारण यह ऐसे काम कर पाएगी, जो हम पहले कभी नहीं कर सके।’

स्पेसएक्स ने केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4.3 अरब डॉलर की लागत वाले ‘रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ (रोमन अंतरिक्ष दूरबीन) को अत्यधिक शक्तिशाली फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया।

यह दूरबीन 16 लाख किलोमीटर दूर उस स्थान के लिए रवाना हुई जहां नासा की एक अन्य प्रमुख अंतरिक्ष दूरबीन ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ पहले से मौजूद है।

बस के आकार वाली इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री दिवंगत नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है।

इसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा। वहां पहुंचने के बाद यह अंतरिक्ष के छिपे हुए हिस्सों की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीर पेश करेगी और ब्रह्मांड के अनजाने रहस्यों का पता लगाएगी।

‘रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ का दृश्य क्षेत्र नासा की ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ की तुलना में 100 गुना से भी अधिक बड़ा है। हबल 36 वर्षों से कक्षा में रहते हुए अंतरिक्ष की शानदार तस्वीरें भेज रही है। वहीं, जेम्स वेब दूरबीन ने कुछ वर्षों पहले इस अभियान में शामिल होकर ब्रह्मांड की शुरुआत से जुड़े बेहद पुराने खगोलीय पिंडों का अध्ययन शुरू किया था।

ये तीनों अंतरिक्ष दूरबीनें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड अंतरिक्ष यान और चिली स्थित वेरा सी. रुबिन वेधशाला के साथ मिलकर ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को उजागर करने में मदद करेंगी।

रोमन परियोजना की वरिष्ठ वैज्ञानिक जूली मैकएनेरी ने कहा, ‘‘रोमन की विशाल पहुंच हमें अजीब, दुर्लभ और असामान्य चीजों को खोजने में मदद करेगी। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने की हमारी परिभाषा को बदल देगी।’’

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोमन दूरबीन ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से को बनाने वाले ‘डार्क मैटर’ और ‘डार्क एनर्जी’ के बारे में भी नयी जानकारी देगी। ये दोनों अब तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं। रोमन द्वारा तैयार आकाशगंगाओं की सूची से वैज्ञानिक को यह समझने में मदद मिलेगी कि इन अदृश्य शक्तियों के कारण ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैल रहा है।

रोमन की सबसे बड़ी खासियत उसकी गति होगी। मैकएनेरी के अनुसार, रोमन जितने मिल्की वे (आकाशगंगा) के अवलोकन एक महीने में कर लेगी, उन्हें पूरा करने में हबल को करीब एक सदी लग सकती है। उन्होंने कहा कि रोमन हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद हिस्से का अब तक का सबसे गहरा अध्ययन कर सकेगी।

इस दूरबीन में एक अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरा लगाया गया है, जिसकी संवेदनशीलता हबल जैसी है, लेकिन यह हबल से करीब 1,000 गुना तेजी से काम करेगा।

इसके अलावा इसमें ऐसा उपकरण भी है, जो तारों की रोशनी को रोक सकेगा। इससे रोमन उन बेहद हल्के ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने में सक्षम हो सकती है, जो किसी तारे की परिक्रमा कर रहे हों।

इस दूरबीन को भविष्य में ईंधन भरने के लिए भी डिजाइन किया गया है। यदि आने वाले दशक में कोई रोबोटिक ईंधन टैंकर उपलब्ध होता है, तो इससे रोमन का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

एपी संतोष अविनाश

अविनाश


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