समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की जरूरत: जयशंकर

समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की जरूरत: जयशंकर

समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने, आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की जरूरत: जयशंकर
Modified Date: June 11, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: June 11, 2026 4:54 pm IST

सोफिया, 11 जून (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, समुद्री व्यापार को सुरक्षित करना और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना वैश्विक आर्थिक जोखिम से निपटने के लिए आवश्यक उपाय हैं।

बुधवार को सोफिया में बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलिस्लावा पेत्रोवा-चमोवा के साथ बातचीत के बाद संवाददाता सम्मेलन में, जयशंकर ने कहा कि कई मुद्दों पर भारत और बुल्गारिया की सोच एक जैसी है।

जयशंकर ने कहा, ‘‘यह खास तौर पर जरूरी है कि समुद्री व्यापार में न तो कोई रुकावट आए और न ही उसे कोई खतरा हो। ‘ग्लोबल साउथ’ की ओर से भारत ने ऊर्जा, खाद्य सामग्री और उर्वरकों से जुड़ी चिंताओं को भी बार-बार उठाया है।’’

‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित या अविकसित देशों के रूप में जाना जाता है। ये देश मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं।

जयशंकर ने कहा, ‘‘जहां तक आर्थिक जोखिम की बात है, तो इसका जवाब आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और उसमें और विविधता लाने में है।’’

उनकी यह टिप्पणी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आई है, जहां हाल के दिनों में भारतीय नाविकों को बार-बार खतरों का सामना करना पड़ रहा है।

जयशंकर ने कहा कि भारत और बुल्गारिया के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं और अब जरूरत इस बात की है कि ‘‘इसे समकालिक और भविष्योन्मुखी रिश्ते में तब्दील किया जाए।’’

आर्थिक मोर्चे पर, उन्होंने कहा कि भारत की 7-8 प्रतिशत की सालाना विकास दर ‘‘कई नये मौके देती है, जो वैश्विक और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर पर हैं।’’

जयशंकर ने भारत में फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, डिजिटल और रक्षा जैसे क्षेत्रों को अवसरों के तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए विदेशों में भी नये निवेश कर रही हैं और सहयोग के नये रास्ते तलाश रही हैं।

मंत्री ने बताया कि सोफिया विश्वविद्यालय में यूरोप के सबसे पुराने विभागों में से एक ‘इंडोलॉजी’ (भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास, संस्कृति, भाषा और साहित्य का अकादमिक अध्ययन) है तथा बुल्गारिया में योग और आयुर्वेद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले भी इस देश में कई भारतीय फ़िल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

जयशंकर ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे भारत वैश्विक रचनात्मक निवेश के एक अहम केंद्र के तौर पर उभर रहा है, इस परंपरा को निश्चित रूप से फिर से शुरू किया जा सकता है, और मैं बुल्गारिया के रचनात्मक उद्योग को भारत आने का न्योता देता हूं।’’

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-बुल्गारिया संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और सहयोग के नये अवसर तलाशे।

सोफिया के दौरे के बाद, जयशंकर बृहस्पतिवार को फिनलैंड जाएंगे। वहां वह ‘कुल्तारंता वार्ता’ के 14वें संस्करण में हिस्सा लेंगे, जिसका विषय है ‘बदलता हुआ विश्व: वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय दृष्टिकोण’। वह फिनलैंड की विदेश मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।

भाषा

सुभाष मनीषा

मनीषा


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