नेपाल बाढ़: अपनों की तलाश, शवों की पहचान मुश्किल

नेपाल बाढ़: अपनों की तलाश, शवों की पहचान मुश्किल

नेपाल बाढ़: अपनों की तलाश, शवों की पहचान मुश्किल
Modified Date: August 31, 2026 / 10:00 pm IST
Published Date: August 31, 2026 10:00 pm IST

गल्छी (नेपाल), 31 अगस्त (भाषा) नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पोखरा के एक अस्पताल में तीन परिवारों ने शुरू में एक ही शव पर अपना दावा किया। तीनों परिवारों को लगा कि उन्हें अपना लापता परिजन मिल गया है। यह घटना आपदा में मृतकों की पहचान करने की बढ़ती चुनौती को उजागर करती है।

‘नेपाल न्यूज’ की खबर के अनुसार पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान अकादमी में रखे शव संख्या 1003 पर बर्दिया के जलविद्युत परियोजना कर्मचारी गोपाल दहित और रुपन्देही के पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल के परिवारों ने दावा किया। एक तीसरे परिवार ने भी शुरू में इस शव को अपने लापता परिजन का शव बताया था। शव की पहचान को लेकर असमंजस के बीच दोनों परिवार डीएनए जांच कराने पर सहमत हो गए हैं।

यह मामला दर्शाता है कि परिवारों और अधिकारियों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ में दूर निचले इलाकों से बरामद शवों को अस्पतालों में लाया जा रहा है, जहां पहचान तय करने के लिए अक्सर तस्वीरों, शारीरिक बनावट और निजी सामान का सहारा लिया जा रहा है।

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों लोग लापता हैं।

‘नेपाल न्यूज’ के अनुसार पोखरा में परिजन अस्पताल पहुंचकर अज्ञात शवों की तस्वीरें देख रहे हैं और चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, दांत, कान, होंठ तथा अन्य विशिष्ट पहचान चिह्नों की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर में कहा गया है कि कि गोरखा, तनहुं, धादिंग और नवलपरासी पूर्वी जिलों से बरामद 102 शवों को पोखरा लाया गया है। पोखरा राजधानी काठमांडू से करीब 280 किलोमीटर दूर स्थित शहर है।

अब तक 16 शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया था, जबकि सुबह तक 87 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका था। पहचान को लेकर दावों में विवाद के चलते पुलिस ने पांच परिवारों के परिजनों के डीएनए नमूने लिए थे।

दहित परिवार के लिए तलाश तब शुरू हुई, जब जलविद्युत परियोजना में काम करने के लिए रसुवा गए गोपाल बाढ़ के दौरान लापता हो गए।

‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, दहित की बहन मांजी थारू और अन्य परिजन बर्दिया से गैंदाकोट पहुंचे, जहां उन्हें बरामद शवों की तस्वीरें दिखाई गईं। उन्होंने शव संख्या 1003 की पहचान गोपाल के रूप में की।

इसके बाद वे उन्हें घर ले जाने की उम्मीद में पोखरा पहुंचे। लेकिन परिवार के शव लेने से पहले ही दामोदर बस्याल के परिजनों ने भी उस शव पर अपना दावा कर दिया।

बस्याल के परिवार ने कहा कि शव की कई शारीरिक विशेषताएं उनके लापता परिजन से मेल खाती हैं। वहीं, दहित के परिवार ने कहा कि शव के दांत, माथा, होंठ, हाथ, छाती और चेहरा गोपाल से मेल खाते हैं। दोनों परिवार इस विवाद को सुलझाने के लिए डीएनए जांच कराने पर सहमत हो गए।

एक अन्य मामले में एक परिवार ने पांच वर्षीय बच्चे की पहचान उसके पास मौजूद सामान के आधार पर की।

भाषा आशीष माधव

माधव


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