काठमांडू, दो सितंबर (भाषा) नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को प्रतिनिधि सभा को भोटेकोशी नदी में आई भयावह बाढ़ से हुई तबाही के बारे में जानकारी दी और कहा कि इस संकट से निपटने के लिए ‘‘दृढ़ संकल्प और साहस’’ की जरूरत है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, जिसमें 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 4,800 से ज्यादा लोग लापता हैं।
‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा, ‘‘संकट की इस घड़ी में हमने यह सच्चाई स्वीकार कर ली है कि देश के नेतृत्व को हिम्मत, समर्थन और भरोसा देना चाहिए, न कि आंसू।’’ उन्होंने कहा कि इस आपदा ने न केवल तीन जिलों – रसुवा, नुवाकोट और धादिंग – को तबाह किया है, बल्कि यह ‘‘पूरे देश के लिए एक आघात है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पास दृढ़ संकल्प और साहस के साथ लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और हम लड़ रहे हैं।’’
बचाव और राहत कार्यों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य चलाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है जबकि स्थानीय अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित इलाकों में जाने को कहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पीड़ितों के परिवारों के लिए आर्थिक मदद को मंजूरी दी है और प्रभावित इलाकों को तीन महीने के लिए संकटग्रस्त घोषित किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार घायलों का मुफ्त इलाज कर रही है और बाढ़ से बेघर हुए लोगों के लिए खाने-पीने और रहने की व्यवस्था कर रही है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सदन को बताया कि स्थानीय और प्रांतीय अधिकारी बिजली, पानी की आपूर्ति और सड़क संपर्क बहाल करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए।
इसी तरह, अब तक गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनहुं से 38 शव बरामद किए गए हैं।
भाषा सुभाष नरेश
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