काठमांडू, 31 मई (भाषा) नेपाल की संसद का सत्र गत 11 मई को शुरू होने के बाद से कार्यवाही से अनुपस्थित प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह रविवार को पहली बार सदन में उपस्थित हुए और पहले ही दिन भारत के साथ सीमा मुद्दे पर उनके जवाब से विवाद खड़ा हो गया।
शाह ने मार्च में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। वह इस महीने संसद सत्र शुरू होने के बाद से पहली बार सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देने के लिए प्रतिनिधि सभा में उपस्थित थे।
महीने की शुरुआत में, विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री शाह की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग करते हुए कम से कम चार बार संसद की कार्यवाही बाधित की और एक बार तो इसका बहिष्कार भी किया।
सत्ताधारी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरएसपी) के दो सदस्यों सहित सात सांसदों ने प्रधानमंत्री से मानवाधिकार आयोग की हालिया रिपोर्ट, भारत के साथ कालापानी-लिपुलेख क्षेत्र विवाद, भूमिहीन अतिक्रमणकारियों के प्रबंधन, सहकारी निधि के दुरुपयोग, विदेश में रहने वाले नेपालियों के मताधिकार, सुशासन और यात्रा वीजा के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों पर सवाल पूछे।
इन सवालों का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में ‘जेन जेड’ आंदोलन के संबंध में दी गई सिफारिशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
श्रम संस्कृति पार्टी (एसएसपी) के एरेन राय के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, शाह ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से सीमा मुद्दे के समाधान की बात कही और उनकी ऐसी ही कुछ टिप्पणियों से विवाद हो गया।
इसपर नीति विशेषज्ञों, पूर्व राजनयिकों, सांसदों और यहां तक कि सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
भाषा वैभव सुरेश
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