India-Nepal Border Dispute: भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने को तैयार है ये पड़ोसी देश.. बॉर्डर डिस्प्यूट के लिए इसे ठहराया जिम्मेदार, आप भी पढ़ें बयान

Ads

PM Balen Shah on India-Nepal Border Dispute: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद सुलझाने के लिए ब्रिटेन को भी वार्ता में शामिल करने की बात कही।

  •  
  • Publish Date - May 31, 2026 / 05:48 PM IST,
    Updated On - May 31, 2026 / 05:48 PM IST

PM Balen Shah on India-Nepal Border Dispute || Image- PMF IAS File

HIGHLIGHTS
  • नेपाल ने सीमा विवाद समाधान के लिए बातचीत पर दिया जोर।
  • बालेन्द्र शाह ने ब्रिटेन की भूमिका पर भी चर्चा की।
  • कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा विवाद फिर चर्चा में।

काठमांडू: नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत और चीन के साथ चल रहे सीमा विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत का दायरा बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों के समाधान के लिए ब्रिटेन को भी चर्चा प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। (PM Balen Shah on India-Nepal Border Dispute) ऐसा इसलिए क्योंकि वर्तमान सीमाओं का इतिहास ब्रिटिश शासन काल से जुड़ा हुआ है। मार्च के अंत में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहली बार प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए बालेन्द्र शाह ने कहा कि सीमा संबंधी समस्याओं का समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से ही निकाला जाएगा।

IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़े

ब्रिटेन को भी बातचीत में किया जाये शामिल

प्रधानमंत्री शाह ने संसद में कहा कि ब्रिटिश भारत के समय बनी सीमाओं से जुड़े कई विवाद आज भी मौजूद हैं। उनके अनुसार, जब ब्रिटेन इस क्षेत्र से गया तो कुछ समस्याएं भविष्य की पीढ़ियों के लिए छोड़ गया। इसी कारण नेपाल का मानना है कि ब्रिटेन को भी इस विषय में रुचि लेनी चाहिए और उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर समाधान खोजने में सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि नेपाल और भारत के बीच इस विषय पर राजनयिक स्तर पर बातचीत पहले से जारी है। (PM Balen Shah on India-Nepal Border Dispute) दोनों देशों के इतिहासकारों, सर्वेक्षण विशेषज्ञों और भूगोल विशेषज्ञों को साथ बैठाकर सीमावर्ती क्षेत्रों का अध्ययन करने की योजना बनाई गई है।

भारत ने दोहराया अपना रुख

भारत ने हाल ही में कहा था कि वह नेपाल के साथ सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि सीमा विवादों को लेकर भारत का रुख पहले जैसा ही बना हुआ है। रणधीर जायसवाल ने कहा था कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है और इसका उपयोग दशकों से किया जा रहा है। भारत का कहना है कि नेपाल के कुछ क्षेत्रीय दावे ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित नहीं हैं। नई दिल्ली का मानना है कि एकतरफा तरीके से सीमा दावों का विस्तार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

2020 में बढ़ा था विवाद

साल 2020 में नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताया गया था। नेपाल ने बाद में इस नक्शे को संवैधानिक मान्यता भी दी। (PM Balen Shah on India-Nepal Border Dispute) भारत ने उस समय इस कदम का विरोध करते हुए कहा था कि यह एकतरफा कार्रवाई है और दोनों देशों के बीच सीमा विवादों को बातचीत से सुलझाने की सहमति के विपरीत है।

IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे Instagram Page को Follow करें

चीन का भी जुड़ा है पहलू

यह विवाद केवल भारत और नेपाल तक सीमित नहीं है, क्योंकि संबंधित क्षेत्र चीन की सीमा से भी जुड़ा हुआ है। वर्ष 2023 में चीन द्वारा जारी एक आधिकारिक नक्शे ने भी इस क्षेत्र को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया था। नेपाल और चीन के बीच सीमा निर्धारण 1960 के दशक में हो चुका है, लेकिन नदियों के रास्ते बदलने, ग्लेशियरों के पिघलने और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ स्थानों पर सीमांकन को लेकर मतभेद बने रहते हैं। फिलहाल भारत, नेपाल और चीन तीनों देशों ने विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और आपसी संबंधों को सामान्य बनाए रखने की इच्छा जताई है।

इन्हें भी पढ़ें:

भारत, अमेरिका के मुख्य वार्ताकार एक जून से अंतरिम व्यापार समझौते पर करेंगे वार्ता

ब्रिटेन की विदेश मंत्री वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के लिए भारत और चीन का दौरा करेंगी

जनता 2027 के चुनावों में भाजपा की सारी तिकड़म निकाल देगी: अखिलेश यादव

अमेरिका के सहयोगी देशों ने नये खतरों का सामना करने के लिए वैश्विक एकता की अपील की

एस्टोनियाई स्टार्टअप भारत के साथ साझेदारी, उसके बड़े बाजार में प्रवेश को लेकर उत्सुक

राजस्थान के कई इलाकों में बारिश, फलोदी में अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री दर्ज

FAQ 1: प्रश्न: नेपाल सीमा विवाद समाधान के लिए क्या प्रस्ताव दे रहा है?

उत्तर: नेपाल बातचीत, ऐतिहासिक दस्तावेजों और विशेषज्ञों की मदद से समाधान चाहता है।

FAQ 2: प्रश्न: भारत-नेपाल सीमा विवाद किन क्षेत्रों से जुड़ा है?

उत्तर: कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र विवाद के प्रमुख केंद्र हैं।

FAQ 3: प्रश्न: नेपाल ब्रिटेन को वार्ता में क्यों शामिल करना चाहता है?

उत्तर: नेपाल का मानना है कि विवादित सीमाएं ब्रिटिश काल की विरासत हैं।