(अलनूर इब्राहिम, टफ्ट्स विश्वविद्यालय)
मैसाचुसेट्स, 15 फरवरी (द कन्वरसेशन) सबसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने साल 2023 के अपने ‘मिशन स्टेटमेंट’ में कहा था कि उसका लक्ष्य ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का विकास करना है, “जो मानवता के लिए सुरक्षित और फायदेमंद हो तथा जिसका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना न हो।”
हालांकि, अब ऐसा लगता है कि चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई का “सुरक्षित” एआई के विकास पर उतना जोर नहीं रह गया है।
नवंबर 2025 में जारी और 2024 को कवर करने वाले इसके नवीनतम आंतरिक राजस्व घोषणा फॉर्म की समीक्षा करते समय, मैंने देखा कि ओपनएआई ने अन्य बदलावों के साथ-साथ अपने ‘मिशन स्टेटमेंट’ से “सुरक्षित” शब्द हटा दिया है। शब्दों में यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब कंपनी एक गैर-लाभकारी संगठन से तेजी से एक ऐसे व्यवसाय में तब्दील हो गई है, जिसका ध्यान मुनाफे पर केंद्रित है।
ओपनएआई को वर्तमान में अपने उत्पादों की सुरक्षा से संबंधित कई मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए यह बदलाव खबर बनने लायक है। एआई कंपनी पर मुकदमा करने वाले कई वादी मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करने, गलत तरीके से मौत और आत्महत्या में मदद करने का आरोप लगाते हैं, जबकि अन्य ने लापरवाही के आरोप में मुकदमे दायर किए हैं।
गैर-लाभकारी संस्थाओं की जवाबदेही और सामाजिक उद्यमों के संचालन के विद्वान के रूप में, मैं ओपनएआई के ‘मिशन स्टेटमेंट’ से “सुरक्षित” शब्द को हटाए जाने को एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखता हूं, जिसकी रिपोर्ट विशेष रूप से कुछ चुनिंदा स्रोतों के बाहर बड़े पैमाने पर नहीं की गई है।
मेरा मानना है कि ओपनएआई की नीति में बदलाव इस बात की एक आजमाइश है कि हम एक समाज के रूप में उन संगठनों के काम की निगरानी कैसे करते हैं, जिनमें अपार लाभ प्रदान करने और विनाशकारी नुकसान पहुंचाने दोनों की क्षमता है।
ओपनएआई की स्थापना
ओपनएआई ने ‘सोरा’ नाम के एक वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐप का भी निर्माण किया है। कंपनी की स्थापना 2015 में एक गैर-लाभकारी वैज्ञानिक अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य धन कमाना नहीं था, बल्कि अपने निष्कर्षों को सार्वजनिक और रॉयल्टी-मुक्त बनाकर समाज को लाभ पहुंचाना था।
अपने एआई मॉडल के विकास के लिए आवश्यक धन जुटाने के वास्ते मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सैम ऑल्टमैन के नेतृत्व में ओपनएआई ने 2019 में एक लाभ-आधारित सहायक कंपनी बनाई। माइक्रोसॉफ्ट ने शुरू में इस उद्यम में एक अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया; 2024 तक यह राशि 13 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई।
इसके बदले में, माइक्रोसॉफ्ट को भविष्य के मुनाफे का एक हिस्सा देने का वादा किया गया था, जो इसके शुरुआती निवेश के 100 गुना तक सीमित था। लेकिन सॉफ्टवेयर क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी को ओपनएआई के गैर-लाभकारी बोर्ड में जगह नहीं मिली–यानी उसके पास उस एआई उद्यम को दिशा देने की शक्ति नहीं थी, जिसमें वह निवेश कर रही थी।
नयी संरचना का उदय
अक्टूबर 2025 में ओपनएआई ने कैलिफोर्निया और डेलावेयर के अटॉर्नी जनरल के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत वह एक अधिक पारंपरिक लाभ कमाने वाली कंपनी बन जाएगी।
नयी व्यवस्था के तहत, ओपनएआई को दो संस्थाओं में विभाजित किया गया है : एक गैर-लाभकारी संस्था और एक लाभ कमाने वाला व्यवसाय।
पुनर्गठित गैर-लाभकारी संस्था ‘ओपनएआई फाउंडेशन’ के ओपनएआई समूह में लगभग एक-चौथाई शेयर हैं। दोनों कंपनियों का मुख्यालय कैलिफोर्निया में है।
इस नयी संरचना का वर्णन कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल और ओपनएआई के बीच अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) में किया गया है, जिसे डेलावेयर के अटॉर्नी जनरल का अनुमोदन हासिल है।
कई व्यावसायिक मीडिया संस्थानों ने इस कदम की सराहना करते हुए भविष्यवाणी की कि इससे अधिक निवेश आएगा। दो महीने बाद जापानी समूह सॉफ्टबैंक ने ओपनएआई में 41 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को अंतिम रूप दिया।
मेरे विचार में ये बदलाव स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत देते हैं कि ओपनएआई अपने उत्पादों की सुरक्षा की तुलना में अपने मुनाफे को अधिक प्राथमिकता दे रही है।
(द कन्वरसेशन) देवेंद्र पारुल
पारुल