अब लीक से हटकर फिल्में नहीं बन रही: तापसी पन्नू

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अब लीक से हटकर फिल्में नहीं बन रही: तापसी पन्नू

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  • Publish Date - February 15, 2026 / 06:42 PM IST,
    Updated On - February 15, 2026 / 06:42 PM IST

मुंबई, 15 फरवरी (भाषा) अभिनेत्री तापसी पन्नू का मानना है कि अब महिला प्रधान और लीक से हटकर फिल्में नहीं बन रही हैं क्योंकि ऐसी कहानियों के लिए दर्शकों का समर्थन नहीं मिल रहा है।

मुख्यधारा और लीक से हटकर दोनों तरह के सिनेमा में सहजता से संतुलन बनाए रखने वाली पन्नू ने एक भरोसेमंद कलाकार के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बनाई है और ‘थप्पड़’, ‘मुल्क’ व ‘पिंक’ जैसे कई फिल्मों में दमदार अभिनय किया है।

अभिनेत्री के अनुसार, लीक से अलग कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारने की लड़ाई और भी कठिन हो गई है।

पन्नू ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘ऐसी फिल्में विलुप्ती की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों की तरह हो गई हैं। मेरा अभिप्राय ‘अस्सी’ जैसी फिल्मों से है। हमारे तथाकथित व्यावसायिक सिनेमा का एक निश्चित ढांचा है जिसका हम पालन करते हैं और हम उस ढांचे में पारंपरिक रूप से फिट नहीं बैठते।’’

पन्नू की नयी फिल्म ‘‘अस्सी’’ है। इसके निर्माता अनुभव सिन्हा हैं। पन्नू से सिन्हा के साथ 2018 में आई फिल्म ‘मुल्क’ और 2020 की ‘थप्पड़’ में भी काम किया था।

अभिनेत्री ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि लीक से हटकर बनने वाली फिल्में केवल डिजिटल मंच पर ही अपनी जगह बना पाएंगी। उन्होंने कहा कि ‘स्ट्रीमिंग’ मंच ने अपना ध्यान ‘बड़े पैमाने पर’ दर्शकों को लुभाने पर केंद्रित कर दिया है।

पन्नू ने कहा, ‘असलियत यह है कि लोग सोचते हैं कि इस तरह की फिल्में ओटीटी पर आती रहेंगी और हम उन्हें देखते रहेंगे। लेकिन नहीं, ओटीटी मंच भी इस तरह की फिल्में नहीं चाहते। वे केवल उन्हीं फिल्मों को चुनते हैं जो सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन कर रही हों।’

पन्नू ने कहा, ‘‘वे सिनेमाघर के दर्शकों को अपने मंच पर लाना चाहते हैं। वे कहते हैं, ‘हमारे पास पहले से ही इस तरह के दर्शक हैं, हम अपने देश के उन लोकप्रिय मसाला फिल्मों के दर्शकों को अपने मंच से जोड़ना चाहते हैं।’ इसीलिए मैं कहती हूं कि अगर लोगों को यह एहसास नहीं हुआ कि हमें इसे देखना चाहिए तो लीक से हटकर बनने वाली फिल्में विलुप्त हो जाएंगी। कभी-कभी वास्तविकता देखना भी अच्छा होता है।’

सिनेमा की तुलना विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से करते हुए अभिनेत्री (38) ने कहा कि जहां एक ओर व्यावसायिक सिनेमा ‘मुगलई’ की अपनी अपील है, वहीं उद्योग को ‘दाल चावल’ जैसी कहानियों की भी आवश्यकता है: ऐसी कहानियां जो रोजमर्रा की वास्तविकता पर आधारित हों।

भाषा

शुभम धीरज

धीरज

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