पाक की अदालत ने सेना पर विवादित टिप्पणी मामले में इमरान खान की बहन को जमानत दी
पाक की अदालत ने सेना पर विवादित टिप्पणी मामले में इमरान खान की बहन को जमानत दी
(एम. जुल्करनैन)
लाहौर, 30 जुलाई (भाषा) पाकिस्तान की एक अदालत ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी को बृहस्पतिवार को एक हफ्ते की सुरक्षात्मक जमानत दे दी। यह राहत उन्हें देश की साइबर अपराध-रोधी संस्था द्वारा मामला दर्ज किए जाने के दो दिन बाद मिली है। नूरीन पर आरोप है कि उन्होंने पिछले साल भारत के साथ हुए चार-दिवसीय सशस्त्र संघर्ष पर टिप्पणी करते हुए ‘‘पाकिस्तान के सशस्त्र बलों को नीचा दिखाया’’ था।
न्यायालय के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) के न्यायमूर्ति सरदार अकबर अली ने बृहस्पतिवार को नियाजी की सुरक्षात्मक जमानत याचिका पर सुनवाई की और राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (एनसीसीआईए) को जमानत अवधि के दौरान उन्हें गिरफ्तार करने से रोक दिया। अदालत ने उन्हें कानूनी राहत के लिए एक सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत का रुख करने का निर्देश दिया।’’
उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान नियाजी के वकील ने कहा कि एनसीसीआईए ने इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम कानून के तहत उनकी मुवक्किल के खिलाफ मामला दर्ज किया है और सक्षम अदालत से अंतरिम जमानत लेने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘नियाजी की याचिका स्वीकार करते हुए एलएचसी ने उन्हें सुरक्षात्मक जमानत दे दी और निर्धारित समय के भीतर संबंधित अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।’’
एनसीसीआईए ने मंगलवार को नियाजी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी के अनुसार, नियाजी ने पाकिस्तान और उसकी सशस्त्र सेनाओं के खिलाफ ‘झूठे’ आरोप लगाए।
प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘नूरीन नियाजी ने सरकार में जनता के विश्वास को कमजोर करने और लोगों में भय पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने सरकार और सुरक्षा संस्थानों के खिलाफ झूठी, उकसाने वाली, अपमानजनक और धमकी भरी सामग्री प्रसारित की तथा एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाया।’
एजेंसी ने 18 जुलाई को उन्हें समन जारी किया। उनपर आरोप था कि उन्होंने सरकारी संस्थानों को बदनाम करने और ‘फर्जी विमर्श’ फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर ‘गलत, आपत्तिजनक और भड़काऊ’ सामग्री प्रसारित की। बाद में एजेंसी ने इस्लामाबाद स्थित अपने दफ्तर में उनसे पूछताछ की।
इस महीने की शुरुआत में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित एक साक्षात्कार में नियाजी ने दावा किया था कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य टकराव पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच मिलीभगत का परिणाम था तथा इसे सशस्त्र बलों की छवि सुधारने के लिए अंजाम दिया गया था।
साक्षात्कार में नियाजी ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के साथ हुए चार दिन के सैन्य संघर्ष में पाकिस्तानी सेना के जवाबी हमले को कमतर दिखाने की कोशिश की।
उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया था कि भारत ने संघर्ष को बढ़ाने से इसलिए परहेज किया, क्योंकि पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा था और इस घटनाक्रम का उद्देश्य इस्लामाबाद को अब्राहम समझौतों में शामिल होने में मदद करना था।
पाकिस्तान उन कई देशों में शामिल है, जो इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देते हैं और उसके साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं रखते हैं। ‘अब्राहम समझौता’ 2020 में अमेरिका द्वारा कराए गए समझौतों की एक शृंखला है, जिसने इज़राइल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित किए। इन अरब देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, सूडान और मोरक्को भी शामिल हैं।
भाषा शुभम सुरेश
सुरेश

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