(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 26 सितंबर (भाषा) सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने यमन के हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों के मद्देनजर ‘मक्का रक्षा गठबंधन’ के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा में सहयोग करने का संकल्प लिया है। पाकिस्तान की सेना ने शनिवार को यह जानकारी दी।
तीनों देशों ने पिछले महीने एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सामूहिक रक्षा की व्यवस्था की गई है। समझौते के अनुसार, किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
सेना के एक बयान के अनुसार, तीनों देशों के रक्षा बलों के प्रमुखों और ‘चीफ्स ऑफ जनरल स्टाफ’ की बैठक शुक्रवार को रियाद में हुई।
बैठक में सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति और उसके सामने मौजूद खतरों की समीक्षा की गई।
बयान में कहा गया, ‘‘प्रतिभागियों ने सामूहिक रक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के तीनों देशों के संकल्प को दिखाया।’’
बयान के अनुसार, प्रतिभागियों ने पवित्र शहर मक्का तथा असैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए हमलों पर नाराजगी जताई। उन्होंने सऊदी अरब के सशस्त्र बलों की सतर्कता और पेशेवर रवैये की सराहना की।
बैठक में तीनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को और बढ़ाने तथा खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य समन्वय और क्षमताओं के एकीकरण को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
सेना के अनुसार, प्रतिभागियों ने कहा कि रियाद में हुई बैठक तीनों देशों की रक्षा साझेदारी की मजबूती और ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को तत्काल प्रभावी सैन्य सहयोग में बदलने के साझा संकल्प को दर्शाती है।
यह बैठक तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की न्यूयॉर्क में हुई मुलाकात के एक दिन बाद हुई। उस बैठक में उन्होंने सऊदी अरब के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की थी।
पाकिस्तान ने बुधवार को पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को इस त्रिपक्षीय गठबंधन का पहला महासचिव नियुक्त किया था।
भाषा सिम्मी रंजन
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