विस्थापन पीढ़ियों तक न चले, सुरक्षा परिषद कदम उठाए: संरा शरणार्थी प्रमुख सालेह

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विस्थापन पीढ़ियों तक न चले, सुरक्षा परिषद कदम उठाए: संरा शरणार्थी प्रमुख सालेह

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  • Publish Date - September 26, 2026 / 08:42 AM IST,
    Updated On - September 26, 2026 / 08:42 AM IST

संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (एपी) संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थी मामलों के प्रमुख बरहम सालेह ने दुनियाभर के देशों से आग्रह किया कि वे संघर्षों और संकटों को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करें ताकि अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर 11.7 करोड़ से अधिक लोग घर वापस लौट सकें और उनकी भावी पीढ़ियों को विस्थापित होकर किसी दूसरे देश में न रहना पड़े।

सालेह ने पिछले साल दिसंबर में शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त चुने जाने के बाद सुरक्षा परिषद को पहली बार संबोधित किया।

उन्होंने 15 सदस्यों वाली परिषद से कहा कि उन पर (सदस्य देशों पर) ‘‘शांति कायम करने में मदद करने की विशेष जिम्मेदारी’’ है।

वर्ष 2018 से 2022 तक इराक के राष्ट्रपति रहे सालेह स्वयं भी शरणार्थी रह चुके हैं।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक महासभा से इतर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (यूएनएचसीआर) जैसे मानवीय सहायता संगठनों के कर्मी संघर्षों के दुष्परिणामों से हर दिन निपटते हैं, लेकिन वे शांति स्थापित नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने का दायित्व संभालने वाली सुरक्षा परिषद को सौंपी गई है।

सालेह ने उन विभिन्न संघर्षों का उल्लेख किया जिनके कारण लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

उन्होंने कहा कि सूडान में युद्ध दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन संकट बना हुआ है और देश के भीतर एवं बाहर कुल 1.2 करोड़ लोग विस्थापित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक यह युद्ध जारी रहेगा, लोग पलायन करते रहेंगे।’’

सालेह ने कहा कि कांगो में ‘‘कई पीढ़ियां संघर्ष और हिंसा के दौर से गुजर चुकी हैं’’ और अब इबोला के बढ़ते संकट ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण देश के भीतर लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि लाखों अन्य लोगों को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी है।

शरणार्थी मामलों के प्रमुख ने माना कि लंबे समय से विस्थापित और मानवीय सहायता पर निर्भर शरणार्थियों की संख्या 2035 तक आधी करने का उनका लक्ष्य ‘‘महत्वाकांक्षी’’ है।

उन्होंने कहा कि यूएनएचसीआर का लक्ष्य होना चाहिए कि ‘‘जहां संभव हो, वहां विस्थापन को रोका जाए, जहां लोग विस्थापित हो चुके हैं वहां ऐसी परिस्थितियां बनाई जाएं कि लोग सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।’’

एपी सिम्मी शोभना

शोभना