ढाका, 19 अगस्त (भाषा) बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं कि उनके बांग्लादेशी समकक्ष तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा ‘‘यादगार’’ हो। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत होते संबंधों से अंततः भारत और बांग्लादेश के लोगों तथा कारोबारियों को लाभ होगा।
उच्चायुक्त की यह टिप्पणी मंगलवार को ऐसे समय आई है, जब 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रहमान की नयी दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ढाका द्वारा अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर दोनों देशों के बीच संबंधों में एक बार फिर तनाव पैदा हुआ है।
समाचार पोर्टल ‘टीबीएसन्यूज डॉट नेट’ की खबर के मुताबिक, ढाका में मंगलवार को भारतीय उच्चायोग की ओर से प्रमुख बांग्लादेशी कारोबारी नेताओं और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की यात्रा पर आए प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में आयोजित स्वागत समारोह में त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश दिया है कि दोनों नेताओं को मुलाकात करनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत यात्रा के दौरान रहमान का उचित स्वागत किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ एक बात कही। हमें मिलना चाहिए। और आप मेरी ओर से उन्हें बता सकते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री ने आपको आश्वासन दिया है कि जब बांग्लादेश के माननीय प्रधानमंत्री भारत आएंगे, तो उनका वैसा ही सम्मानजनक स्वागत किया जाएगा, जिसके वह हकदार हैं।’’
त्रिवेदी ने कहा कि मोदी चाहते हैं कि रहमान की भारत यात्रा ‘‘यादगार’’ हो। उन्होंने जोर दिया कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत संपर्क और संवाद से दोनों पड़ोसी देशों को लाभ होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘अंततः इसका लाभ लोगों और कारोबारियों को मिलेगा। दुनिया भर के कारोबारी इस दूरी को पाटने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।’’
त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों को अतीत के मतभेदों को दूर करते हुए भविष्य की ओर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा कि आप अतीत को भूल जाएं, लेकिन अतीत को ध्यान में रखते हुए पुराने मतभेदों को सुलझाएं और आगे बढ़ें। ठहराव की स्थिति में न रहें।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘जीवंत लोकतंत्रों’’ के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं और इन्हें बातचीत तथा आपसी संपर्क के जरिए दूर किया जा सकता है।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘हम बांग्लादेश के भाई-बहनों की चिंताओं को गहराई से समझते हैं। निश्चित रूप से चिंताएं हैं। लेकिन यह बराबरी की साझेदारी है।’’
उन्होंने जोर देकर कहा कि टिकाऊ संबंधों के लिए आपसी विश्वास बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘लंबे समय तक चलने वाले किसी भी संबंध की नींव आपसी और बिना शर्त विश्वास है।’’
भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में ‘‘उतार-चढ़ाव’’ आए हैं, लेकिन दोनों को अपने व्यापक संबंधों पर मतभेदों का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा साझा इतिहास है, हमारी साझा संस्कृति है और हमें इन्हीं को आगे बढ़ाने की जरूरत है।’’
बांग्लादेश की युवा पीढ़ी का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत ‘‘नए बांग्लादेश’’ के साथ मिलकर वहां के युवाओं के लिए अधिक अवसर पैदा करना चाहता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक नया बांग्लादेश है और इस नए बांग्लादेश के पास युवा शक्ति है। इन युवाओं ने बहुत संघर्ष और बलिदान देखा है। इसलिए हमारा उद्देश्य स्पष्ट रूप से शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना है और युवाओं को इसके लिए अवसर मिलना चाहिए।’’
त्रिवेदी ने कहा कि भारत और बांग्लादेश का इतिहास, संस्कृति और आकांक्षाएं साझा हैं और दोनों देशों को इन समानताओं को आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम केवल सीमा साझा नहीं करते, बल्कि हम सपने, आकांक्षाएं और समानता भी साझा करते हैं।’’ उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क के महत्व पर भी जोर दिया।
त्रिवेदी ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में कारोबारी समुदाय की अधिक भागीदारी की भी अपील की। उन्होंने कहा कि रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा करने में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने भारतीय और बांग्लादेशी कंपनियों से व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने तथा द्विपक्षीय संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत में योगदान देने का आग्रह किया।
सीआईआई का प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने के लिए ढाका की यात्रा पर है।
भारतीय उच्चायुक्त ने कहा कि मजबूत आर्थिक संबंध और लोगों के बीच बढ़ता संपर्क दोनों देशों के बीच बेहतर समझ विकसित करने में मदद कर सकता है तथा अधिक स्थिर और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाने के प्रयासों को मजबूती दे सकता है।
रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा का मुद्दा हाल में दोनों देशों के बीच संबंधों में आई गिरावट के कारण महत्वपूर्ण हो गया है। यह गिरावट पांच अगस्त को नयी दिल्ली से शेख हसीना द्वारा डिजिटल माध्यम से मीडिया से की गयी बातचीत के बाद आयी।
बांग्लादेश ने इस संवाददाता सम्मेलन पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि इस कार्यक्रम से उसके लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि हसीना से संबंधित इस मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और बांग्लादेश सरकार के बारे में कार्यक्रम में कही गई किसी भी बात का वह समर्थन नहीं करता।
हसीना को अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता से हटा दिया गया था और वह भारत चली गयी थीं। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान कथित ‘‘मानवता के खिलाफ अपराध’’ के मामले में उन्हें उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी।
इसके बाद से ढाका भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। वहीं, नयी दिल्ली का कहना है कि प्रत्यर्पण अनुरोध की लागू कानूनों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा