पीओके: ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन के तीन दिन बाद पर्वतारोही पुर्जा का शव मिला
पीओके: ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन के तीन दिन बाद पर्वतारोही पुर्जा का शव मिला
(एम जुल्करनैन)
लाहौर, दो अगस्त (भाषा) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान में ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद रविवार को अनुभवी नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का शव मिला।
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (एसीपी) ने बताया कि 43 वर्षीय पर्वतारोही का शव लगभग 5,700 मीटर की ऊंचाई पर मिला।
इसमें कहा गया है कि अब तक पांच पर्वतारोहियों के शव बरामद कर लिए गए हैं और बाकी पांच का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं।
एसीपी ने कहा, ‘‘जमीनी बचाव टीम ब्रॉड पीक पर लगभग 5,700 मीटर की ऊंचाई पर ‘निम्स दाई’ के पास निर्मल पुर्जा तक पहुंच गई है, जहां तीन और शव भी देखे गए हैं, हालांकि उनकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है।’’
बयान में कहा गया कि जमीनी बचाव टीम शवों को जापानी शिविर तक लाएगी और बेहद मुश्किल इलाकों में शवों को निकालने की कोशिशें जारी हैं।
एसीपी ने कहा कि पहाड़ की बनावट, हिमस्खलन का जोखिम और खड़ी ढलानें बचाव कार्यों में चुनौतियां पैदा कर रही हैं, क्योंकि मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं किया जा सका।
बृहस्पतिवार को के2 के पास काराकोरम श्रृंखला में मौजूद ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन की चपेट में पुर्जा और अन्य पर्वतारोही आ गए। इनमें नेपाल के पांच, एक पाकिस्तानी, एक ओमानी, एक अमेरिकी और एक चीनी पर्वतारोही शामिल थे।
यह दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है और इसे चढ़ाई के लिए सबसे मुश्किल चोटियों में से एक माना जाता है।
पुर्जा की पर्वतारोहण कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ ने शनिवार को घोषणा की कि समूह के सभी सदस्यों की मौत हो गई।
एसीपी अध्यक्ष मेजर जनरल इरफान अरशद ने बताया कि शुक्रवार को दस में से चार शव बरामद किए गए। इनमें से तीन की पहचान ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल-हार्थी, नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग और अमेरिकी मैलोरी गीस के तौर पर हुई है।
उन्होंने बताया कि शवों को गिलगित-बाल्टिस्तान के शहर स्कार्दू विमान से लाया गया है।
पुर्जा का पर्वतारोहण का करियर बहुत शानदार रहा। उन्होंने 2019 में दुनिया भर में 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर महज छह महीने और छह दिन में सफलतापूर्वक चढ़ाई करके एक नया रिकॉर्ड बनाया था। ब्रॉड पीक पर चढ़ाई पूरी करने के बाद, वह सभी आठ-हजार मीटर की ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों पर दो बार चढ़ाई करने का अपना मिशन पूरा करने वाले थे।
भाषा धीरज रंजन
रंजन

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