(अश्विनी श्रीवास्तव)
बुखारेस्ट (रोमानिया), 25 जुलाई (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यूरोप के तीन देशों के अपने दौरे का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन किया और उनकी इस यात्रा के दौरान व्यापार एवं पर्यटन समेत कई अहम क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर वार्ता हुई।
मुर्मू ने 20 जुलाई को मोल्दोवा की राजकीय यात्रा के साथ अपने दौरे की शुरुआत की। यह किसी भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की मोल्दोवा की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने मोल्दोवा की अपनी समकक्ष माया संदू के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत की।
दोनों देश पारस्परिक हित के कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए, जिनमें कृषि, साजो-सामान और बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार शामिल हैं।
मोल्दोवा के बाद, मुर्मू ने 21 से 22 जुलाई तक उत्तरी मकदूनिया का दौरा किया। वह दक्षिण-पूर्वी यूरोप के इस देश की यात्रा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति हैं।
उनकी इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति जताई और पर्यटन, आतिथ्य-सत्कार और फिल्म निर्माण जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की।
यह चर्चा राष्ट्रपति मुर्मू और उनकी समकक्ष गोर्डाना सिजानोव्स्का-दावकोवा के बीच हुई बैठक के दौरान हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई।
उन्होंने उत्तरी मकदूनिया की संसद और भारत-उत्तरी मकदूनिया बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को भी संबोधित किया।
इसके बाद मुर्मू 23 जुलाई को रोमानिया पहुंचीं। तीन दशकों से भी अधिक समय में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की इस देश की यह पहली यात्रा थी।
अपनी यात्रा के दौरान, भारत और रोमानिया अगले तीन वर्षों में व्यापार को दोगुना करने और रक्षा सहित द्विपक्षीय साझेदारी के अन्य अहम क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए।
उन्होंने अपने रोमानियाई समकक्ष निकुसोर डैन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
मुर्मू ने शुक्रवार को देश की राजधानी बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित किया और प्रधानमंत्री इली बोलोजान के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर अलग से व्यापक चर्चा की।
यहां ‘बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज’ ने मुर्मू को डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी प्रदान की।
मुर्मू ने शनिवार को हवाई अड्डा के लिए रवाना होने से पहले प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की।
भाषा
सुभाष पवनेश
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