इस्लामाबाद, 14 जून (एपी) ईरान और अमेरिका के तीन महीने से अधिक समय से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक शांति समझौते के और करीब पहुंचने के बीच कतर के मध्यस्थ शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए रविवार को तेहरान पहुंचे। दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि अमेरिका और ईरान आखिरकार एक ऐसे समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे उस युद्ध को रोका जा सकेगा, जिसमें हजारों लोग मारे गए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकेगा, जिसके बंद होने से दुनियाभर के बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा था कि समझौते पर रविवार को दस्तखत होंगे, जबकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि हस्ताक्षर आने वाले दिनों में हो सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, समझौते पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे और इस बाबत आमने-सामने की कोई बैठक या समारोह नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि हस्ताक्षर कब और कहां किए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, समझौता ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम और जब्त संपत्तियों सहित अन्य मुद्दों का समाधान नहीं उपलब्ध कराता है, लेकिन इन मुद्दों पर तकनीकी परामर्श के लिए 60 दिन का ढांचा पेश करता है।
अधिकारियों ने बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की महीनों की कोशिशों का जिक्र किया, जिसमें दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर बनाए रखना और कई मौकों पर बातचीत को पूरी तरह से नाकाम होने से रोकना शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि अभी जिस समझौते पर बातचीत हो रही है, उसे देखकर लगता है कि अमेरिका और इजराइल, ईरान के मिसाइल एवं परमाणु कार्यक्रम को रुकवाने के अपने शुरुआती लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि समझौते का मौजूदा मसौदा इन मुद्दों को कैसे सुलझाएगा या क्या ये मुद्दे अंतिम समझौते का हिस्सा होंगे।
इस बीच, ट्रंप के सोमवार से शुरू होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने के मुद्दे पर चर्चा करने की उम्मीद है। यह जलमार्ग कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसे उत्पादों की बड़ी खेप के लिए बहुत अहम है। इससे जहाजों की आवाजाही बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।
एपी पारुल सुरेश
सुरेश