वाशिंगटन, 21 फरवरी (एपी) कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों को ट्रंप प्रशासन के साथ उनके सबसे बड़े मतभेदों में से एक को लेकर शुक्रवार को कुछ घंटों के लिए कुछ राहत मिलती हुई प्रतीत हुई, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिकी।
न्यायालय ने यह उल्लेख करते हुए कि शुल्क (टैरिफ) लगाने की शक्ति कांग्रेस के के पास है, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक ‘टैरिफ’ व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से को रद्द कर दिया।
कई रिपब्लिकन नेताओं ने शुक्रवार सुबह के इस फैसले का संयमित बयानों के साथ स्वागत किया, कुछ ने तो इसकी प्रशंसा भी की, और जीओपी नेताओं ने कहा कि वे भविष्य में ‘टैरिफ’ के मुद्दे पर ट्रंप के साथ मिलकर काम करेंगे।
लेकिन दोपहर तक, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि उनका कांग्रेस के साथ काम करने का कोई इरादा नहीं है और इसके बजाय वह 10 प्रतिशत का एक नया वैश्विक आयात शुल्क लगाकर अकेले ही आगे बढ़ेंगे।
वह यह कार्य एक ऐसे कानून के तहत करेंगे जो ‘टैरिफ’ को 150 दिन तक सीमित करता है। इससे पहले कभी भी इस तरह से इस कानून का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इस फैसले का न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, बल्कि रिपब्लिकन नेताओं को आने वाले महीनों तक ट्रंप के ‘टैरिफ’ पर जवाब देना होगा, खासकर मध्यावधि चुनावों के नजदीक आने के साथ।
ट्रंप ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मुझे टैरिफ लगाने का अधिकार है, और मुझे हमेशा से टैरिफ लगाने का अधिकार रहा है।” उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस की कोई जरूरत नहीं है।
‘टैरिफ’ उन कुछ मुद्दों में से एक है जहां रिपब्लिकन-नियंत्रित कांग्रेस ने ट्रंप से असहमति जताई है। प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों ने समय-समय पर कनाडा जैसे व्यापारिक साझेदारों पर लगाए जा रहे ‘टैरिफ’ की निंदा करने के उद्देश्य से प्रस्ताव पारित किए हैं।
एपी नेत्रपाल प्रशांत
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