आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए : भारत

आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए : भारत

आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए : भारत
Modified Date: January 16, 2026 / 10:32 am IST
Published Date: January 16, 2026 10:32 am IST

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 16 जनवरी (भाषा) भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद इस विश्व निकाय के मंचों का अपने ‘‘विभाजनकारी एजेंडे’’ को आगे बढ़ाने के लिए दुरुपयोग करने पर इस्लामाबाद से कड़ी नाराजगी जताई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूज ने बृहस्पतिवार को कहा कि आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग बहुलतावादी और लोकतांत्रिक देशों में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब सदस्य देशों को संकीर्ण विचारों से ऊपर उठना चाहिए, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के सभी मंचों और प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाता रहा है।’’

संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण सत्र में ‘संगठन के कार्य पर महासचिव की रिपोर्ट’ पर राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए पुन्नूज ने कहा, ‘‘यह मंच भी इसका अपवाद नहीं है और पाकिस्तान ने भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का अनुचित उल्लेख किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आत्मनिर्णय का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित एक मौलिक सिद्धांत है। हालांकि, इस अधिकार का दुरुपयोग बहुलतावादी और लोकतांत्रिक देशों में अलगाववाद को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। पाकिस्तान की आदत है लेकिन उसे निराधार आरोपों और झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए और वास्तविकता से दूर तस्वीर को पेश करने से बचना चाहिए।’’

भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद द्वारा महासभा में अपने वक्तव्य में जम्मू कश्मीर का संदर्भ दिए जाने के बाद आई।

पाकिस्तान बार-बार संयुक्त राष्ट्र और उसके विभिन्न मंचों पर जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन इस मामले में उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कोई खास समर्थन नहीं मिला है।

अपने वक्तव्य में पुन्नूज ने यह भी कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ को विकास वित्तपोषण, जलवायु न्याय और वित्त समेत कई क्षेत्रों में विशिष्ट विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने लगातार इन मुद्दों को सभी संयुक्त राष्ट्र मंचों पर प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया है। इस दिशा में समन्वित और केंद्रित अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता है। आगे बढ़ते हुए ‘ग्लोबल साउथ’ की भावनाओं को ठोस और वास्तविक कदमों में बदलने की जरूरत है।’’

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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