( रेन्स्के जोन्गेन, एजेक्वीयल एम मार्जिनेल्ली एवं पॉल ग्रिब्बेन – यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी )
सिडनी, छह मई (द कन्वरसेशन) समुद्र के बढ़ते तापमान से समुद्री घास (सीग्रास) और उसके नीचे मौजूद सूक्ष्मजीवों के साथ उसके महत्वपूर्ण संबंधों पर खतरा पैदा हो सकता है, जिससे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकते हैं। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में लेक मैक्वेरी के पश्चिमी हिस्से में स्थित मायूना बे में पानी के भीतर समुद्री घास मीलों दूर तक फैली है। यहां सबसे सामान्य प्रजाति ‘जोस्टेरा म्यूलेरी’ है, जिसकी लंबी रिबन जैसी पत्तियां होती हैं और जो छोटी मछलियों, झींगा और केकड़ों के लिए आश्रय प्रदान करती है।
मायूना बे दिखने में सामान्य लग सकता है, लेकिन यह एक अनोखी प्राकृतिक प्रयोगशाला रहा है। पास स्थित एरारिंग पावर स्टेशन द्वारा दशकों तक झील में गर्म पानी छोड़े जाने के कारण यहां का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में एक से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है।
‘न्यू फाइटोलॉजिस्ट’ पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के तापमान में वृद्धि होने पर समुद्री घास और तलछट में रहने वाले सूक्ष्मजीवों के बीच संबंध कैसे प्रभावित होते हैं।
महत्वपूर्ण तटीय आवास
समुद्री घास को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन यह पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण तटीय आवासों में से एक है। यह तलछट को स्थिर करती है, पानी की सफाई कर पारदर्शिता बढ़ाती है और कई समुद्री जीवों के लिए भोजन व आश्रय प्रदान करती है। साथ ही, यह बड़ी मात्रा में कार्बन संग्रहित कर जलवायु परिवर्तन को धीमा करने में भी मदद करती है।
समुद्री घास अकेले कार्य नहीं करती। इसकी जड़ों के आसपास तलछट में बैक्टीरिया, फफूंद और अन्य सूक्ष्मजीवों का एक छिपा हुआ नेटवर्क मौजूद होता है, जो पौधों के साथ परस्पर क्रिया करता है। ये सूक्ष्मजीव पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं, कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हैं और हानिकारक तत्वों को निष्क्रिय करते हैं।
यह संबंध कुछ हद तक प्रवाल (कोरल) और उनके भीतर रहने वाले सूक्ष्म शैवाल के बीच साझेदारी जैसा है। जहां प्रवाल ऊर्जा के लिए शैवाल पर निर्भर रहते हैं, वहीं समुद्री घास अपने आसपास के वातावरण को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सूक्ष्मजीवों पर निर्भर करती है।
हालांकि, सभी सूक्ष्मजीव लाभकारी नहीं होते। कुछ सल्फाइड नामक यौगिक बनाते हैं, जो अधिक मात्रा में होने पर समुद्री घास की जड़ों के लिए विषाक्त हो सकता है।
भविष्य की स्थिति का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने मायूना बे में एक फील्ड प्रयोग कर यह समझने की कोशिश की कि समुद्र के गर्म होने पर यह संबंध कैसे बदलता है। उन्होंने सामान्य और अधिक तापमान वाले क्षेत्रों से समुद्री घास और तलछट के नमूने लिए।
कुछ नमूनों में सूक्ष्मजीवों को यथावत रखा गया, जबकि अन्य में तलछट को 121 डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर सूक्ष्मजीवों को लगभग समाप्त कर दिया गया। इसके बाद पौधों को इन अलग-अलग परिस्थितियों में रखकर उनके विकास और जीवित रहने की क्षमता का अध्ययन किया गया।
एक महीने के बाद पाया गया कि सामान्य तापमान वाले क्षेत्रों की तलछट में पौधे अच्छी तरह बढ़े, चाहे सूक्ष्मजीव मौजूद हों या नहीं। लेकिन गर्म क्षेत्रों की तलछट में, जहां सूक्ष्मजीव सक्रिय थे, पौधों का प्रदर्शन खराब रहा और उनकी वृद्धि कम पाई गई।
सूक्ष्मजीवों की भूमिका अहम
शोधकर्ताओं के अनुसार, उच्च तापमान सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ा सकता है, जिससे सल्फाइड का उत्पादन बढ़ता है और यह समुद्री घास के लिए हानिकारक हो सकता है।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को केवल पौधों के आधार पर नहीं समझा जा सकता, बल्कि उनके आसपास मौजूद सूक्ष्मजीव समुदाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संरक्षण के लिए संकेत
दुनियाभर में समुद्री घास के मैदान तटीय विकास, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण घट रहे हैं। संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजनाएं आमतौर पर केवल पौधों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, लेकिन यह अध्ययन बताता है कि तलछट की स्थिति और सूक्ष्मजीव समुदाय भी सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि जैसे-जैसे समुद्र का तापमान बढ़ेगा, समुद्री घास का भविष्य केवल दिखाई देने वाले पौधों पर नहीं, बल्कि उनके नीचे रहने वाले सूक्ष्मजीवों पर भी निर्भर करेगा।
द कन्वरसेशन मनीषा पवनेश
पवनेश