सऊदी अरब ने मक्का पर हमले की कोशिश को ‘लक्ष्मण रेखा’ बताया

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सऊदी अरब ने मक्का पर हमले की कोशिश को ‘लक्ष्मण रेखा’ बताया

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 03:54 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 03:54 PM IST

काहिरा, 16 सितंबर (एपी) सऊदी अरब ने ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों पर इस्लाम के सबसे पवित्र शहर पर हमला करने की कोशिश का आरोप लगाया, इस पर क्षेत्र के देशों ने निंदा तो की लेकिन किसी ने भी सैन्य मदद का संकेत नहीं दिया।

अमेरिका का अहम सहयोगी सऊदी अरब ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के नए मोर्चे में और गहराई से उलझता जा रहा है और उसने मक्का को ‘लक्ष्मण रेखा’ करार दिया है।

दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब पर उसके क्षेत्रीय दुश्मन तेहरान के समर्थक विद्रोहियों द्वारा हमले हो रहे हैं। ऐसे में, इस देश को अपने कच्चे तेल के लिए एक सुरक्षित रास्ते और साथ ही सैन्य मदद की जरूरत है। हालांकि, इन दोनों में से किसी के लिए भी कोई स्पष्ट विकल्प अभी तक नहीं दिख रहा है।

खबरों के मुताबिक, सऊदी अरब की एक अहम पाइपलाइन हफ्तों से बंद है, क्योंकि यमन के हूती विद्रोही देश की अवसंरचना और लाल सागर में उसके जहाजों पर हमले कर रहे हैं। ईरान अभी होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बना रहा है। इन घटनाक्रमों के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।

हूतियों ने यमन की सीमा से लगभग 1,100 किलोमीटर दूर मक्का की ओर ड्रोन दागने से इनकार किया। सऊदी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के जन्मस्थान के ऊपर हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही ड्रोन को नष्ट कर दिया।

इस बीच तुर्किये और पाकिस्तान की तरफ से कहा गया कि सऊदी ने उनसे किसी मदद का अनुरोध नहीं किया।

सऊदी अरब, उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) सदस्य तुर्किये और परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के बीच एक नया रक्षा समझौता अभी तक अमल में नहीं आया है। तुर्किये और पाकिस्तान के अधिकारियों ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि हूतियों की बढ़ती आक्रामकता के जवाब में उन्हें सऊदी अरब से मदद का कोई अनुरोध नहीं मिला है।

तुर्किये के अधिकारी ने कहा कि समझौते के लागू होने से पहले गठबंधन को “संस्थागत” बनाने की कोशिशें पूरी की जानी चाहिए।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश की निंदा की और कहा कि उनका देश और सऊदी अरब “पूरी मजबूती से कंधे से कंधा मिलाकर” खड़े हैं। 57 से ज्यादा मुस्लिम देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ ने भी इसकी निंदा की और कहा कि यह कोशिश “पवित्र स्थलों की पवित्रता” का उल्लंघन करती है।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश