नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्कूली बच्चों ने दिया अपना जेब खर्च

नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्कूली बच्चों ने दिया अपना जेब खर्च

नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्कूली बच्चों ने दिया अपना जेब खर्च
Modified Date: September 3, 2026 / 03:58 pm IST
Published Date: September 3, 2026 3:58 pm IST

काठमांडू, तीन सितंबर (भाषा) नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए देश-विदेश से सहायता पहुंच रही है, लेकिन कई स्कूली बच्चों ने अपने स्तर पर मदद का हाथ बढ़ाते हुए अपने जलपान के पैसे, गुल्लक में जमा रकम और जेब खर्च से बचाए कुछ रुपये दान किए हैं।

रसुवा में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से घरों के बह जाने, परिवारों के बिछड़ने और स्कूलों के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें लगातार टेलीविजन पर दिखाई जा रही हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने वाले बच्चों ने भी अपनी छोटी-छोटी बचत साझा कर पीड़ितों की मदद करने का प्रयास किया है।

‘द काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार, अछाम जिले की मंगलसेन नगरपालिका-5 स्थित षोडश माध्यमिक विद्यालय में यह पहल नौवीं कक्षा के छात्र यूनिक केसी के सुझाव पर शुरू हुई।

करीब 1,500 विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व कर रहे छात्र-नेतृत्व वाले बाल क्लब की सोमवार को सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के विदाई कार्यक्रम को लेकर बैठक हुई थी। इस दौरान यूनिक ने बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए कुछ करने का सुझाव दिया।

इसके बाद उन बच्चों के लिए चंदा जुटाने का फैसला किया गया, जिन्होंने बाढ़ में अपने घर या परिजन खो दिए हैं या जिनकी शिक्षा प्रभावित हुई है।

यूनिक ने कहा, ‘‘मुझे लगा कि भले ही हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, फिर भी हम कुछ कर सकते हैं।’’

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों ने स्कूल की सभी कक्षाओं में जाकर स्वैच्छिक योगदान मांगा। उन्हें पांच से 500 नेपाली रुपये तक की रकम मिली। कुछ विद्यार्थियों ने वह पैसा भी दिया, जो वे आम तौर पर जलपान पर खर्च करते।

दसवीं कक्षा की छात्रा लक्ष्मी शाही ने कहा, ‘‘हममें से कुछ के लिए इसका मतलब जलपान पर खर्च होने वाले पैसे का इस्तेमाल करना था, ताकि बाढ़ से प्रभावित विद्यार्थियों की मदद हो सके।’’

आपदा में अपने परिजनों को खोने वाले विद्यार्थियों ने भी योगदान दिया। शाही ने कहा, ‘‘जिन सात दोस्तों ने अपने माता-पिता को खोया है, उन्होंने भी योगदान दिया। हम अपने जैसे विद्यार्थियों की मदद करना चाहते थे।’’

बाल क्लब ने पहले दिन 8,785 नेपाली रुपये और दूसरे दिन 5,470 नेपाली रुपये जुटाए, जिससे कुल राशि 14,255 नेपाली रुपये हो गई। शिक्षक धन कुमार केसी ने बताया कि यह रकम बुधवार को राष्ट्रीय वाणिज्य बैंक के माध्यम से प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर दी गई।

उन्होंने कहा, ‘‘योगदान छोटा या बड़ा नहीं होता।’’ उन्होंने बताया कि राहत राशि जुटाने की पहल विद्यार्थियों ने खुद की थी और उनकी भूमिका केवल उन्हें सहयोग देने तक सीमित रही।

मंगलसेन-1 स्थित प्रगतिशील बेसिक स्कूल में भी विद्यार्थियों ने इसी तरह एक दिन के जलपान के पैसे दान किए। शिक्षक हिम्मत बहादुर रावल ने बताया कि विद्यार्थियों ने 585 नेपाली रुपये जुटाए, जिन्हें राहत कोष में जमा किया गया।

कपिलवस्तु में धर्मनपानिया स्थित राष्ट्रीय जनहित माध्यमिक विद्यालय की पांचवीं कक्षा की नौ वर्षीय छात्रा सौम्या उपाध्याय ने बुधवार को जलपान के लिए अपने माता-पिता से सामान्य से 20 रुपये अधिक मांगे। इसके बाद उसने उस दिन मिले 50 रुपये दान कर दिए।

इसी स्कूल की तीसरी कक्षा की सात वर्षीय छात्रा राधिका कोहर ने 30 रुपये दान किए। दोनों बच्चियों ने जलपान नहीं किया और पैसे दान पेटी में डाल दिए।

उनसे प्रेरित होकर उनके सहपाठियों ने भी सुबह की प्रार्थना सभा के बाद पांच से 100 नेपाली रुपये तक का योगदान दिया। इससे 10,050 नेपाली रुपये जुटे, जिन्हें बाद में प्रधानमंत्री प्राकृतिक आपदा राहत कोष में जमा कराया गया।

प्रधानाध्यापक राज कुमार कोहर ने बताया कि स्कूल के 350 विद्यार्थियों में से 200 से अधिक ने योगदान दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने खुद चंदा पेटी बनाई और कक्षा-कक्षा जाकर अपने साथियों से योगदान देने का अनुरोध किया।

रौतहट जिले की देवाही गोनाही नगरपालिका-7 स्थित प्रेमपुर गोनाही माध्यमिक विद्यालय के 26 विद्यार्थियों ने भी जलपान के लिए मिलने वाले पांच और 10 नेपाली रुपये बचाकर कुल 470 रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा किए।

प्रधानाध्यापक मुकेश यादव ने कहा कि विद्यार्थियों की इस पहल ने दिखाया कि दूरी किसी दूसरे समुदाय के दुख को साझा करने में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने कहा, ‘‘भूगोल लोगों को अलग रख सकता है, लेकिन पीड़ा साझा होती है।’’

काठमांडू के मनमैजू माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की अगुवाई में छठी से 12वीं कक्षा तक के बच्चों ने जलपान के खर्च में कटौती कर 37,110 नेपाली रुपये जुटाए। यह रकम प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा की गई।

ये छोटे-छोटे योगदान रसुवा और आसपास के जिलों में भोटेकोशी आपदा से हुई व्यापक तबाही के बीच आए हैं। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में कई स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं और उनकी कक्षाओं में कीचड़, रेत और गाद भर गई है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई।

बाढ़ से हुई तबाही में मरने वालों की संख्या बृहस्पतिवार को 1,250 से अधिक हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए जाने के बाद मृतक संख्या बढ़ी है, जबकि 4,800 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

बताया जाता है कि बुधवार दोपहर तक प्रधानमंत्री राहत कोष में 7.77 अरब नेपाली रुपये जमा हो चुके थे, जबकि सरकार के डॉलर खाते में करीब 60 लाख अमेरिकी डॉलर जमा किए गए थे।

भाषा मनीषा शोभना

शोभना


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