समुद्री मार्ग नाविकों के लिए सुरक्षित रहने चाहिए : जी7 में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा
समुद्री मार्ग नाविकों के लिए सुरक्षित रहने चाहिए : जी7 में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा
एवियॉन (फ्रांस), 16 जून (भाषा) ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिनों बाद, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत जी7 नेताओं की बैठक में कहा कि सभी देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।
जी7 शिखर सम्मेलन के संपर्क सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और कई भारतीय नागरिकों की जान गई है।
पिछले हफ़्ते ओमान के तट पर एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में चालक दल के तीन भारतीय सदस्यों की मौत के बाद भारत में बढ़ते गुस्से के बीच, मोदी ने समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपनी द्विपक्षीय बातचीत से एक दिन पहले यह मुद्दा उठाया।
‘नयी साझेदारियां तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से बनाने’ के विषय पर यहां आयोजित सत्र में मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष के कारण क्षेत्र में हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें जो वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को जोड़ते हैं। हमें यह पक्का करना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।”
अपने संबोधन में, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और घटनाक्रमों पर चर्चा करते हुए मोदी ने देशों के बीच “भरोसे” की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति खनिज, तकनीक या बाज़ार नहीं, बल्कि आपसी भरोसा है।
उन्होंने कहा, “आज की दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर है। किसी देश की ऊर्जा, भोजन, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा, साथ ही उसकी आर्थिक समृद्धि, सिर्फ़ उसकी अपनी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। आवाजाही, डेटा, पूंजी और प्रौद्योगिकी—ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसे समय में, साझेदारी का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, साझेदारी तभी सफल होती है जब उसके मूल में भरोसा हो।”
मोदी ने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की चिंताओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे वैश्विक विकास में भागीदार बनना चाहते हैं।
भाषा प्रशांत सुरभि
सुरभि

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