अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को ईरान के साथ हुए समझौते का विवरण दिया

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अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को ईरान के साथ हुए समझौते का विवरण दिया

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  • Publish Date - June 17, 2026 / 11:33 PM IST,
    Updated On - June 17, 2026 / 11:33 PM IST

दुबई, 17 जून (एपी) कई दिनों तक गोपनीयता बनाए रखने के बाद, बुधवार को अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की जानकारी दी।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात संकेत दिया कि अमेरिका के साथ समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेज़ेश्कियन हस्ताक्षर कर सकते हैं।

शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले, अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर उस मसौदे के बारे में बात की जिसे ईरान ने अभी तक जारी नहीं किया है।

अधिकारियों के अनुसार, समझौते के मसौदे में ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को कम-संवर्धित (डाउनब्लेंड) करने के लिए एक नया “न्यूनतम” मानक शामिल है। साथ ही, इसमें लेबनान के इलाके में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल के हालिया हमलों के बाद लेबनान की “क्षेत्रीय अखंडता” सुनिश्चित करने के प्रावधान भी हैं।

इसके बदले में, समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिका ईरान पर लगे कुछ बड़े प्रतिबंधों को हटाने (लेकिन पूरी तरह खत्म न करने) की दिशा में कदम उठाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि समझौते के अमेरिकी मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बिना शुल्क के गुजरने की सुविधा सिर्फ 60 दिनों के लिए ही पक्की की गई है और इसमें भविष्य में शुल्क लगाने की संभावना को खारिज नहीं किया गया है।

उधर ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेज़ेशकियन हस्ताक्षर कर सकते हैं।

इस तरह का हस्ताक्षर समारोह दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिनके बीच 1980 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास में बंधक संकट के बाद राजनयिक संबंध टूट गए थे।

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के हवाले से यह टिप्पणी की।

पेज़ेश्कियन पश्चिम के साथ बेहतर संबंध बनाने के वादे के साथ राष्ट्रपति बने थे। हालांकि, जनवरी में प्रदर्शनकारियों की बड़े पैमाने पर हत्या और युद्ध के बाद उन्हें महीनों तक हाशिये पर रखा गया था, क्योंकि देश की धर्म-आधारित शासन व्यवस्था की बागडोर कट्टरपंथियों ने संभाल ली है।

एपी प्रशांत सुरभि

सुरभि