सिंगापुर सरकार वेतन से वंचित भारत-बांग्लादेश के 400 श्रमिकों को आर्थिक मदद देगी
सिंगापुर सरकार वेतन से वंचित भारत-बांग्लादेश के 400 श्रमिकों को आर्थिक मदद देगी
(गुरदीप सिंह)
सिंगापुर, 24 जून (भाषा) सिंगापुर सरकार उन लगभग 400 प्रवासी श्रमिकों को आर्थिक सहायता देगी, जिन्हें उनके नियोक्ताओं ने पिछले तीन से चार महीनों से वेतन नहीं दिया है। इनमें अधिकांश श्रमिक भारत और बांग्लादेश के हैं। सरकार ने बुधवार को इसकी घोषणा की।
सरकार की ओर से प्रत्येक प्रभावित श्रमिक को नकद और कूपन के रूप में 200 सिंगापुर डॉलर की सहायता दी जाएगी।
नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एनटीयूसी) के महासचिव एवं श्रम संगठन प्रमुख एनजी ची मेंग ने बताया कि उनका संगठन और गैर-सरकारी संस्था ‘माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर’ मिलकर प्रत्येक श्रमिक को 100 सिंगापुर डॉलर और 100 सिंगापुर डॉलर के सुपरमार्केट कूपन प्रदान करेंगे।
एनजी ने कहा कि एनटीयूसी ने पिछले दो दिनों में लगभग 40 नियोक्ताओं के यहां निर्माण क्षेत्र में उपलब्ध 150 रोजगार अवसरों की भी पहचान की है।
उन्होंने तुआस व्यू डोरमेट्री में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि श्रम संगठन ने श्रमिकों के वेतन संबंधी मुद्दे पर श्रम मंत्रालय के साथ भी चर्चा की है। फिलहाल सभी प्रभावित श्रमिक इसी डोरमेट्री में रह रहे हैं।
इस दौरान वहां मौजूद श्रम राज्यमंत्री दिनेश वासु दास ने कहा कि मंत्रालय उन नियोक्ताओं के खिलाफ मामलों को बेहद गंभीरता से ले रहा है, जिनकी वजह से श्रमिकों को मौजूदा स्थिति का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद मंत्रालय आवश्यक कार्रवाई करेगा।
दास ने कहा कि हालांकि वित्तीय सहायता की यह राशि ‘‘सीमित’’ है, लेकिन इससे प्रभावित श्रमिकों को इस कठिन दौर से उबरने में मदद मिलेगी।
इससे पहले, श्रम मंत्रालय ने सोमवार को भारत और बांग्लादेश के 100 श्रमिकों की शुरुआती शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सिंगापुर में पंजीकृत विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों केपीए इंजीनियरिंग और एसके इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच शुरू की थी।
जांच शुरू होने के बाद और भी श्रमिक सामने आए हैं, जिन्होंने वेतन नहीं मिलने की शिकायत की है। प्रवासी श्रमिकों के हितों के लिए काम करने वाले कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने भी मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ की खबर के अनुसार, मंगलवार को भारत और बांग्लादेश के 100 प्रवासी श्रमिकों के एक अन्य समूह ने वेतन न मिलने और आवास संबंधी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।
भाषा खारी प्रशांत
प्रशांत

Facebook


