कोलंबो, चार मार्च (भाषा) श्रीलंका ने बुधवार को बताया कि उसकी नौसेना ने देश के दक्षिणी तट के पास डूबे एक युद्धपोत से 87 शव बरामद किए और ईरान के 32 नौसैनिकों को बचाया।
विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने संसद को बताया कि श्रीलंकाई नौसेना और तटरक्षक बल को तड़के पांच बजकर आठ मिनट पर दक्षिणी बंदरगाह जिले गॉल से लगभग 40 समुद्री मील की दूरी पर स्थित ‘आईरिस देना’ नामक पोत के डूबने की सूचना मिली थी। हेराथ ने कहा कि श्रीलंकाई नौसेना और वायु सेना ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया।
उन्होंने कहा, “उनमें से 30 को बचा लिया गया जबकि जहाज पर लगभग 180 लोगों के सवार होने की खबर है।”
मंत्री ने कहा कि जहाज के डूबने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। ईरानी पोत ने हाल ही में भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया था।
भारतीय नौसेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वाशिंगटन में कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया।
उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना है।
हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा, “एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था। लेकिन उसे टॉरपीडो से डुबो दिया गया।”
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने उस ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसका नाम ‘सुलेमानी’ के नाम पर रखा गया था।
सुलेमानी, पूर्व ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी थे, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी सेना ने मार गिराया था।
श्रीलंका नौसेना के प्रवक्ता कमांडर बुद्धिका संपथ ने एक प्रश्न के उत्तर में पनडुब्बी हमले में जहाज के डूबने की मीडिया खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
ईरान के सबसे नए युद्धपोतों में से एक, आईरिस देना, मौदगे श्रेणी का एक फ्रिगेट है जो ईरानी नौसेना के लिए समुद्र में गश्त करता है। यह भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पोत-रोधी मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था। पोत पर एक हेलीकॉप्टर भी था।
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि मौजूदा युद्ध के दौरान कम से कम 17 ईरानी नौसैनिक पोतों को डुबो दिया गया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘हम ईरानी नौसेना को भी डुबो रहे हैं – पूरी नौसेना को।’’
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष