बीजिंग, सात अप्रैल (एपी) ताइवान की विपक्षी नेता चेंग ली-वुन मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर चीन पहुंचीं। चेंग ली-वुन इस यात्रा को ‘शांति के लिए यात्रा’ कह रही हैं, क्योंकि बीजिंग स्वशासित द्वीप को अपने नियंत्रण में लाने के लिए दबाव बना रहा है।
ताइवान की विपक्षी नेता की यह यात्रा एक दशक में पहली है और यह शी चिनफिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मई में होने वाली बैठक से पहले हो रही है।
इस बीच, ताइवान की विपक्ष-नियंत्रित संसद ने सरकार द्वारा 40 अरब अमेरिकी डॉलर के विशेष रक्षा बजट को पारित करने के प्रयासों को रोक दिया है। इससे अमेरिका के साथ हथियार सौदों और ताइवान के स्वदेशी रक्षा उद्योग के विकास के वित्त पोषण की उम्मीद थी।
चीन स्वशासित द्वीप को अपना क्षेत्र होने का दावा करता है और इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
बीजिंग द्वीप के आसपास लगभग प्रतिदिन युद्धक विमान और नौसैनिक पोत भेजकर उस पर अपना सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, जबकि उसकी सेना समय-समय पर द्वीप के आसपास वास्तविक गोलीबारी का अभ्यास करती है। नवीनतम अभ्यास दिसंबर में देखा गया।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां “अनावश्यक रूप से तनाव बढ़ाती हैं” और बीजिंग से ताइवान पर सैन्य दबाव बंद करने का आह्वान किया।
ताइपे से रवाना होने से पहले, कुओमिनतांग पार्टी की अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि ताइवान को युद्ध को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए और शांति को बढ़ावा देने के हर अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
चेंग के कुछ समर्थक और विरोधी ताइपे हवाई अड्डे पर नारे लगाते और तख्तियां लिए जमा हुए।
चेंग ने कहा, “चीन की मुख्य भूमि की इस यात्रा का उद्देश्य दुनिया को यह दिखाना है कि शांति की एकतरफा उम्मीद सिर्फ ताइवान ही नहीं रखता।”
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि शांति की इस यात्रा के माध्यम से, सभी लोग दोनों पक्षों के बीच सभी संभावित मतभेदों को सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण संवाद और आदान-प्रदान का उपयोग करने के लिए सीपीसी केंद्रीय कमेटी की ईमानदारी और दृढ़ संकल्प को देखने के लिए और भी उत्सुक हैं।” उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के संक्षिप्त नामों का जिक्र किया।
चीन ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का विरोध करता है।
चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि ताइवान के साथ संबंध चीन का आंतरिक मामला है।
प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, “अमेरिका और ताइवान के बीच सैन्य संबंधों का चीन का विरोध सुसंगत और स्पष्ट है।”
बीजिंग ने ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री की बार-बार आलोचना की है, विशेष रूप से दिसंबर में ट्रंप प्रशासन द्वारा घोषित 11 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के एक बड़े सौदे की, जिसमें मध्यम दूरी की मिसाइल, तोप और ड्रोन शामिल हैं।
चीन ने अमेरिका समेत अपने सभी राजनयिक साझेदारों को ताइपे के साथ औपचारिक संबंध रखने से प्रतिबंधित कर रखा है। अमेरिका ताइवान का सबसे मजबूत अनौपचारिक समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता है और शी-ट्रंप शिखर बैठक में इस हथियार बिक्री पर चर्चा होने की उम्मीद है।
उस समय जारी चीनी सरकार के एक बयान के अनुसार, फरवरी में शी और ट्रंप के बीच हुई बातचीत में, चीनी नेता ने कहा था कि ‘ताइवान को कभी भी चीन से अलग नहीं होने दिया जाएगा। इसमें कहा गया, ‘अमेरिका को ताइवान को हथियार बिक्री के मुद्दे को सावधानी से संभालना चाहिए।’
बीजिंग ने यह भी कहा कि ‘ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।’
ताइवान की सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियां बीजिंग के प्रति अलग-अलग रुख रखती हैं।
यह स्पष्ट नहीं है कि चेंग शंघाई से शुरू होकर बीजिंग में समाप्त होने वाली अपनी छह दिवसीय चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगी या नहीं।
अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के फेलो वेन-टी सुंग ने कहा कि ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी होने के नाते, केएमटी बीजिंग के साथ ऐसा कोई समझौता करने की स्थिति में नहीं है, जिससे पूरा द्वीप प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि हालांकि, चेंग कम्युनिस्ट पार्टी के साथ पार्टी के स्तर पर सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकती हैं, ताकि नियमित संवाद फिर से शुरू किया जा सके या केएमटी-नियंत्रित क्षेत्रों और चीनी शहरों के बीच नगरपालिका स्तर पर संबंधों को मजबूत किया जा सके।
सुंग ने कहा कि चेंग की यात्रा ‘शी-ट्रंप शिखर बैठक से ताइवान जलडमरूमध्य तनाव के मुद्दे को दरकिनार कर सकती है, जिससे अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन भू-रणनीतिक विवाद के मुद्दों के बजाय साझा हितों के व्यावसायिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।’
केएमटी ने कम रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है और सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के बड़े बजट की आलोचना करते हुए इसे हथियारों की खरीद के लिए ‘अंधाधुंध खर्च’ बताया है।
चेंग की यह यात्रा ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के प्रति बीजिंग के रवैये से बिलकुल अलग है। चीन लाई चिंग-ते से कोई संबंध नहीं रखता और उन्हें ‘अलगाववादी’ करार देता है।
ताइवान 1949 से चीन से अलग शासित है, जब एक गृहयुद्ध के बाद कम्युनिस्ट पार्टी बीजिंग में सत्ता में आई। पराजित केएमटी ताकतें ताइवान भाग गईं, जहां उन्होंने अपनी सरकार बनाई।
लाई की पार्टी ताइवान को एक संप्रभु देश मानती है, न कि चीन के अधीन। वहीं, केएमटी आधिकारिक तौर पर केवल एक चीन को मान्यता देती है, जिसे वह चीन गणराज्य के रूप में देखती है।
एपी
अमित दिलीप
दिलीप