होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से मंडरा रहा समुद्री जैव-आक्रमण का खतरा

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होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से मंडरा रहा समुद्री जैव-आक्रमण का खतरा

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 05:15 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 05:15 PM IST

(चैड हेविट, लिंकन यूनिवर्सिटी; इयान डेविडसन, कॉथ्रॉन इंस्टीट्यूट; मारियो टैम्बुरी, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड)

लिंकन (न्यूजीलैंड), 10 अगस्त (द कन्वरसेशन) होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के आर्थिक असर की काफी चर्चा हो रही है, लेकिन लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित रहने से पैदा होने वाले पारिस्थितिक नुकसान के खतरे पर अब तक अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है।

हालिया शोध के अनुसार, फरवरी से फारस की खाड़ी में खड़े 1,500 से अधिक वाणिज्यिक जहाज एक गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक स्थिर रहने के कारण इन जहाजों के बाहरी हिस्सों पर समुद्री जीवों और वनस्पतियों की परत, जिसे ‘बायोफाउलिंग’ कहा जाता है, जमा हो सकती है।

यह खतरा तब और बढ़ सकता है जब होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलने के बाद ये जहाज अलग-अलग बंदरगाहों की ओर रवाना होंगे। इनके साथ ऐसे समुद्री जीव नए क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव-सुरक्षा के लिहाज से एक तरह की ‘सुपर-स्प्रेडर’ (तेजी से प्रसारित होने वाले) घटना पैदा होने की आशंका है।

इन बाहरी समुद्री जीवों, पौधों, परजीवियों और रोगजनकों के नए क्षेत्रों में पहुंचने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और जंगली मत्स्य संसाधनों के साथ-साथ जलीय कृषि, तटीय उद्योग और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है।

जहाजों के लंबे समय तक खड़े रहने से बढ़ता खतरा—

वाणिज्यिक जहाजों का वैश्विक आवागमन वस्तुओं के परिवहन का प्रमुख माध्यम है। शोधकर्ताओं ने समुद्री व्यापार के 24 ऐसे महत्वपूर्ण मार्गों की पहचान की है, जिन्हें ‘चोक प्वाइंट’ कहा जाता है।

इनमें से 20 के लिए वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं। ऐसे में जहाजों का मार्ग बदला जा सकता है। इससे समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में जहाजों को एक जगह खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती।

हालांकि, चार महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य, बाल्टिक सागर का ओरेसुंड जलडमरूमध्य, काला सागर से बाहर निकलने वाले बोस्फोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य तथा बोहाई सागर का बोहाई जलडमरूमध्य शामिल हैं।

इन मार्गों पर युद्ध और संघर्ष, आतंकवाद एवं समुद्री डकैती, समुद्री दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। वर्ष 2021 में स्वेज नहर में हुई दुर्घटना और 2019 तथा 2023 में पनामा नहर में सूखे के कारण उत्पन्न परिस्थितियां इसके उदाहरण हैं।

आर्थिक संकट में भी खड़े रहते हैं हजारों जहाज—

समुद्र में जहाजों का लंबे समय तक खड़े रहना हमेशा किसी संकट का नतीजा नहीं होता। वैश्विक वाणिज्यिक बेड़े का करीब एक प्रतिशत हिस्सा किसी भी समय जानबूझकर परिचालन से बाहर रखा जाता है। इसके पीछे जहाजों की अधिक उपलब्धता, मौसमी बाजार परिस्थितियां या रखरखाव और आधुनिकीकरण की जरूरत जैसे कारण होते हैं।

वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान वैश्विक आयात और निर्यात में तेज गिरावट के बाद हजारों जहाजों को खड़ा करना पड़ा था। उस समय वैश्विक कंटेनर जहाजों के करीब 10 प्रतिशत और रेफ्रिजरेटेड जहाजों के करीब 25 प्रतिशत जहाज या तो लंगर डालकर निष्क्रिय पड़े थे या सेवा से बाहर कर दिए गए थे।

गौरतलब है कि 1970 के दशक के तेल संकट के दौरान दुनिया भर में 466 टैंकरों को खड़ा करना पड़ा था। बड़ी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के बेड़े भी नियामकीय प्रतिबंधों और मौसम संबंधी सीमाओं के कारण मौसमी रूप से खड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए, दक्षिण चीन सागर में मई से अगस्त के बीच संरक्षण संबंधी मछली पकड़ने पर रोक के दौरान हर साल हजारों नौकाएं खड़ी रहती हैं।

इसी तरह उत्तरी प्रशांत और बेरिंग सागर में मछली पकड़ने वाले बेड़े भी सीमित मौसमी अवधि में काम करते हैं और बाकी समय कुछ चुनिंदा बंदरगाहों में बड़ी संख्या में खड़े रहते हैं।

न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के लिए क्यों चिंता की बात?—

स्थिर खड़े जहाजों की सतह पर कम समय में भी बड़ी मात्रा में बायोफाउलिंग जमा हो सकती है। उष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्रों में यह प्रक्रिया और तेज होती है। जब ये जहाज बाद में किसी दूसरे स्थान के लिए रवाना होते हैं, तो उनके साथ ये जीव भी नए क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं।

इस तरह कोई बाहरी समुद्री पौधा या जीव, परजीवी या बीमारी नए क्षेत्र में प्रवेश कर सकती है और वहां की स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन सकती है।

फारस की खाड़ी में 50 से अधिक गैर-मूल समुद्री प्रजातियां मौजूद हैं और इस क्षेत्र की कई मूल प्रजातियां पहले ही दुनिया के अन्य हिस्सों में पहुंच चुकी हैं।

एक शोध के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास फंसे जहाजों की बड़ी संख्या दोबारा खुलने के बाद पहले महीने में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया पहुंचने की संभावना कम है। लेकिन एक साल के भीतर ऐसे कई जहाज इन देशों के तटों तक पहुंच सकते हैं, जिनके साथ संभावित रूप से आक्रामक प्रजातियां भी आ सकती हैं।

न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दोनों के पास समुद्री जैव-सुरक्षा के लिए मजबूत नियम और नियामकीय ढांचा है। इनमें जोखिम वाले जहाजों की शुरुआती पहचान और तेजी से कार्रवाई करने की व्यवस्था भी शामिल है।

कोविड-19 महामारी के दौरान जब क्रूज जहाज लंबे समय तक खड़े रहे थे, तब न्यूजीलैंड की जैव-सुरक्षा एजेंसी ने ऐसे जहाजों की जांच कर कार्रवाई की थी। प्रभावित जहाजों को या तो न्यूजीलैंड के जलक्षेत्र से बाहर जाने या अपने जहाज के बाहरी हिस्सों और प्रोपेलर तथा रडार जैसे संवेदनशील हिस्सों की सफाई एवं रखरखाव करने के लिए कहा गया था, ताकि वे निर्धारित जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप साफ हो सकें।

हालांकि, कम समय के लिए आने वाले वाणिज्यिक जहाजों में बायोफाउलिंग का प्रबंधन अब भी चुनौतीपूर्ण है।

जोखिम कम करने के लिए क्या किया जा सकता है?—

विशेषज्ञों ने होर्मुज क्षेत्र से आने वाले जहाजों से जुड़े जैव-सुरक्षा जोखिम को कम करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं।

पहला, जहाज के रवाना होने से पहले उसकी सतह पर जमा बायोफाउलिंग की मात्रा का निरीक्षण किया जाना चाहिए। क्षेत्र में ऐसी कई सेवाएं उपलब्ध हैं। जहाजों के आसपास पर्यावरणीय डीएनए (ईडीएनए) के नमूनों की जांच से भी जैव-सुरक्षा खतरे का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

दूसरा, संभव हो तो फारस की खाड़ी से रवाना होने से पहले जहाजों की पानी के भीतर सफाई की जानी चाहिए। हालांकि, सफाई ऐसी होनी चाहिए जिससे जहाज पर जमा जैविक सामग्री और कोटिंग का मलबा सुरक्षित रूप से एकत्र हो, न कि नए जीव और प्रदूषक समुद्र में फैलें। जल्द और सुरक्षित सफाई से जैव-आक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।

तीसरा, जहाजों के संभावित मार्गों का पहले से अनुमान लगाकर यह पता लगाया जाना चाहिए कि खाड़ी से निकलने के बाद वे किस बंदरगाह पर सबसे पहले पहुंचेंगे। इसके आधार पर बंदरगाहों और राष्ट्रीय प्राधिकरणों के साथ सूचना साझा कर जैव-सुरक्षा जोखिम का आकलन किया जा सकता है।

चौथा, जिन देशों और बंदरगाहों पर ऐसे जहाज पहुंचेंगे, उन्हें पर्यावरणीय डीएनए या कम लागत वाली त्वरित जांच के माध्यम से नयी बाहरी प्रजातियों के प्रवेश की शुरुआती पहचान और तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था करनी चाहिए।

इसके अलावा, जैव-सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की जानकारी साझा करने के लिए त्वरित चेतावनी और सूचना प्रसार का नेटवर्क स्थापित किया जाना चाहिए।

वैश्विक सहयोग जरूरी—

होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े इस संभावित ‘सुपर-स्प्रेडर’ जैव-सुरक्षा खतरे को कम करने का अवसर अभी मौजूद है। लेकिन इसके लिए देशों, बंदरगाहों और संबंधित एजेंसियों के बीच वैश्विक स्तर पर सहयोग और समन्वित कार्रवाई जरूरी होगी।

समुद्री जैविक आक्रमण केवल पर्यावरण के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था, मत्स्य संसाधनों, तटीय उद्योगों और समाज के लिए भी दीर्घकालिक नुकसान पैदा हो सकता है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही बहाल होने से पहले जोखिम की पहचान और उससे निपटने की तैयारी करना आने वाले नुकसान को काफी हद तक रोक सकता है।

द कन्वरसेशन रवि कांत रवि कांत नरेश

नरेश